एएसआई की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल अमित श्रीवास्तव ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर का एएसआई वैज्ञानिक जांच-सर्वे कर रहा है। पुरातत्वविदों, पुरालेखविदों, सर्वेक्षणकर्ताओं, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर और अन्य तकनीकी कर्मियों की टीम लगी है। राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई), हैदराबाद के विशेषज्ञों की एक टीम जीपीआर सर्वे कर रही है। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण और अध्ययन भी किया जा रहा है।
स्टैंडिंग काउंसिल ने दाखिल अर्जी के माध्यम से कहा कि सर्वे और जांच के दौरान बहुत सारी वस्तुएं मिली हैं। ढीली मिट्टी और निर्माण सामग्री है। ईंट, कचरा व मलबा मिल रहा है। वैज्ञानिक रूप से संरचनाओं की जांच करने के लिए कार्यशील फर्श के स्तर से ऊपर के मलबे आदि की सफाई जारी है। चूंकि अदालत ने सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि वहां डंप या जमा मलबा खड़े ढांचे को कोई नुकसान पहुंचाए बगैर हटा दिया जाए। मलबा बहुत सावधानी से और व्यवस्थित ढंग से हटाया जा रहा है, जो एक धीमी प्रक्रिया है। न्यायालय के निर्देशानुसार सभी तहखानों की जमीन के सर्वे के लिए साफ करने में कुछ और समय लगेगा। ऐसे में सम्मानपूर्वक प्रार्थना की जाती है कि रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एएसआई को आठ सप्ताह का और समय दिया जाए।
एएसआई ने सर्वे को आगे बढ़ाने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दूसरी बार समय मांगा है। जिला जज की अदालत ने 21 जुलाई को जो आदेश दिया था, उसमें कहा था कि दो अगस्त तक सर्वे रिपोर्ट मुहैया कराई जाए। बाद में मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में चला गया। जब तीन अगस्त को सर्वे जारी रखने का आदेश आया तो एसआई ने समयसीमा बढ़ाने की अर्जी लगाई। इसे जिला जज की अदालत ने स्वीकार किया और सर्वे की रिपोर्ट दो सितंबर तक दाखिल करने का आदेश दिया। अब एएसआई ने फिर समयसीमा बढ़ाने की अर्जी लगाई है।