एएसआई ने सर्वे को आगे बढ़ाने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दूसरी बार समय मांगा है। जिला जज की अदालत ने 21 जुलाई को जो आदेश दिया था, उसमें कहा था कि दो अगस्त तक सर्वे रिपोर्ट मुहैया कराई जाए। बाद में मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में चला गया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ज्ञानवापी के सर्वे और उसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए आठ सप्ताह (56 दिन) का समय मांगा है। इस पर जल्द ही जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत सुनवाई करेगी। फिलहाल, सर्वे जारी है। इसकी रिपोर्ट अदालत को नहीं दी जा सकी है।
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सर्वे की समयसीमा बढ़ाने की अर्जी शनिवार को प्रभारी जिला जज व एडीजे प्रथम संजीव सिन्हा की अदालत में दाखिल की गई। अदालत ने सभी पक्षकारों को सुना, फिर अदालत ने कहा कि जिला जज अवकाश पर हैं। उनके आने के बाद अर्जी प्रस्तुत की जाए। एएसआई की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल अमित श्रीवास्तव ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर का एएसआई वैज्ञानिक जांच-सर्वे कर रहा है। पुरातत्वविदों, पुरालेखविदों, सर्वेक्षणकर्ताओं, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर और अन्य तकनीकी कर्मियों की टीम लगी है। राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई), हैदराबाद के विशेषज्ञों की एक टीम जीपीआर सर्वे कर रही है। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण और अध्ययन भी किया जा रहा है।
मलबे के सफाई में लग रहा वक्त
स्टैंडिंग काउंसिल ने दाखिल अर्जी के माध्यम से कहा कि सर्वे और जांच के दौरान बहुत सारी वस्तुएं मिली हैं। ढीली मिट्टी और निर्माण सामग्री है। ईंट, कचरा व मलबा मिल रहा है। कचरा फेंका गया है। ईंट-पत्थर, ढीले पत्थर के स्लैब और टुकड़े, गिरी हुई सामग्री आदि भी मिले हैं, जो फर्श पर फेंक दिए जाते हैं। तहखानों के साथ-साथ संरचना के चारों ओर का स्तर, संरचना की मूल विशेषताओं को कवर करता है। वैज्ञानिक रूप से संरचनाओं की जांच करने के लिए कार्यशील फर्श के स्तर से ऊपर के मलबे आदि की सफाई जारी है। चूंकि अदालत ने सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि वहां डंप या जमा मलबा खड़े ढांचे को कोई नुकसान पहुंचाए बगैर हटा दिया जाए। मलबा बहुत सावधानी से और व्यवस्थित ढंग से हटाया जा रहा है, जो एक धीमी प्रक्रिया है। न्यायालय के निर्देशानुसार सभी तहखानों की जमीन के सर्वे के लिए साफ करने में कुछ और समय लगेगा। ऐसे में सम्मानपूर्वक प्रार्थना की जाती है कि रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एएसआई को आठ सप्ताह का और समय दिया जाए। अदालत ने अन्य पक्षकारों का पक्ष सुनने के बाद जिला जज के अवकाश पर आने के बाद आवेदन उनके समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
चार अगस्त से चल रहा एएसआई सर्वे
जिला जज की अदालत ने 21 जुलाई 2023 को सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया था। 24 जुलाई को एएसआई ने सर्वे शुरू किया तो अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाया और मसाजिद कमेटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया। कमेटी की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके सर्वे पर रोक लगाने की मांग रखी गई, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज के आदेश को बरकरार रखा। लिहाजा, चार अगस्त से ज्ञानवापी का सर्वे दोबारा शुरू हो गया। 15 अगस्त को सर्वे बंद रहा, फिर लगातार जारी है। 28 दिन से सर्वे चल रहा है। जो साक्ष्य मिल रहे हैं, उसे एएसआई की टीम सुरक्षित कर रही है। दूसरी बार लगाई समयसीमा बढ़ाने की अर्जी
एएसआई ने सर्वे को आगे बढ़ाने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दूसरी बार समय मांगा है। जिला जज की अदालत ने 21 जुलाई को जो आदेश दिया था, उसमें कहा था कि दो अगस्त तक सर्वे रिपोर्ट मुहैया कराई जाए। बाद में मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में चला गया। जब तीन अगस्त को सर्वे जारी रखने का आदेश आया तो एसआई ने समयसीमा बढ़ाने की अर्जी लगाई। इसे जिला जज की अदालत ने स्वीकार किया और सर्वे की रिपोर्ट दो सितंबर तक दाखिल करने का आदेश दिया। अब एएसआई ने फिर समयसीमा बढ़ाने की अर्जी लगाई है।