सर्व मनोरथपूर्ति और घर-परिवार के मंगल के लिए सूर्योपासना का चार दिवसीय डाला षष्ठी व्रत चार नवंबर से आरंभ होगा लेकिन घाटों पर अर्घ्य देने के निमित्त सरकारी स्तर पर होने वाली तैयारियां शून्य हैं। न तो अभी तक घाटों से गाद की सफाई कराई गई है, न ही कच्चे घाटों पर उतरने के लिए रास्ते ही बनाए गए हैं। यूपी-बिहार में तेजी से लोकप्रिय हुए इस व्रत में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा तटों, सरोवरों पर लाखों की तादाद में महिलाओं की भीड़ उमड़ने का अनुमान है। राजघाट से विश्व सुंदरी पुल तक करीब 12 किमी से अधिक लंबे तट पर कतारबद्ध व्रती महिलाएं गंगा जल में खड़ी होकर अर्घ्य देंगी। सरकारी मशीनरी की सुस्ती के बीच लोगों ने वेदियां बनाने के साथ ही घाटों की सफाई और समतलीकरण का काम खुद शुरू कर दिया है।
डाला षष्ठी का व्रत नहाय-खाय के साथ चार नवंबर से आरंभ होगा। छह नवंबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जन सैलाब उमड़ेगा। सात नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं इस व्रत का पारण करेंगी। राजघाट से लेकर पंच अग्नि घाट, रानी घाट, प्रह्लाद घाट से लेकर तेलियानाला घाट सिल्ट के ढेर लगे हैं । इन घाटों पर आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालु छठ पूजा के लिए पहुंचेंगे। विश्व सुंदरी पुल, मलहिया, सामने घाट, नगवा, तुलसी घाट तक भीड़ का रेला बना रहता है।
घाटों के किनारे गंदगी और गाद का अंबार लगा है। घाटों पर उतरने के लिए रास्ते तक नहीं बने हैं। झाड़ियों से घाटों का किनारा पटा पड़ा है। इसे लेकर पूजा करने वाली व्रतियों और उनके परिवार के सदस्यों की चिंता बढ़ गई है। विश्वसुंदरी पुल से तुलसी घाट तक इस साल बाढ़ आने की वजह से हर जगह गाद भर गई है लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी सफाई शुरू नहीं कराई गई है। सामने घाट जाने वाला रास्ता बाढ़ में बह चुका है। इसे बिजली विभाग और पीडब्ल्यूडी के द्वारा बनाया जा रहा है। रविदास घाट पर भी गंदगी पटी है, जबकि इस घाट पर ही 11 नवंबर से गंगा महोत्सव का संगीतोत्सव आरंभ होगा। इसमें सीएम अखिलेश यादव की आने की चर्चा है।
सिर्फ अस्सी घाट पर गाद की सफाई कराकर स्वयंसेवी संस्थाओं और निगम प्रशासन ने कार्यों की इतिश्री कर ली है। छठ पूजा में लाखों की तादाद में भीड़ उमड़ने का अनुमान है। मदरवा में अपने से लोग घाटों की सफाई कराने के साथ ही गंगा तट पर उतरने के लिए रास्ता बनाने में लग गए हैं। वेदी बनाने के लिए लोग खुद ही सफाई करने में भी जुटे हैं। आदित्य नगर पोखरे पर भी क्षेत्रीय नागरिकों ने सफाई करके पूजा की तैयारियां शुरू कर दी हैं।