सारनाथ। आल इंडिया फेडरेशन आफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स और इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से दो दिवसीय देव दीपावली वाराणसी टैक्स कांफ्रें स में वक्ताओं ने जीएसटी पर मंथन किया। बतौर मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विनीत सरन ने कहा कि आर्थिक भ्रष्टाचार को दूर करने में जीएसटी की अहम भूमिका है। इसके लिए सभी को आगे आने की जरूरत है।
मवइया स्थित एक लॉन में कांफ्रेंस का उद्घाटन करने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि काला धन देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहा है। इससे निपटने में जीएसटी पर मंथन जरूरी है। बतौर विशिष्ट अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भूषण आर गवई ने कहा कि टैक्स के बारे में अधिवक्ता, विधि प्रोफेशनल, विधिज्ञाता, विश्वविद्यालय एवं लॉ स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा शोधकर इसका सही मूल्यांकन करने की जरूरत है। अगर सरकार इन शोधों पर ध्यान देगी तो यह देश के विकास में सहायक होगा। न्यायाधीश कृष्ण मुरारी ने देश में करों के बार-बार बदलने, उसके परिमार्जन की बात कही। बताया कि एक देश एक कर की अवधारणा होनी चाहिए। इसके लिए लोगों को जागरूक करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीयूष अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी लागू होने के डेढ़ साल बाद भी लोगों में असमंजस हैं। इस तरह के कांफ्रेंस के माध्यम से लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
आईटीएटी के अध्यक्ष पीपी भट्ट ने कहा कि कम से कम लागत में ज्यादा संख्या में टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी निर्णय हो रहे हैं। इसे पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। एआईएफटीपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक सर्राफ ने कहा कि समय-समय पर कर प्रणाली में सुधार के लिए सरकार को सलाह की आवश्यकता होती है। संस्थान की ओर से गांव शहर में अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान हाईकोर्ट न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष एआईएफटीपी पीसी जोशी सहित कई लोगों ने अपनी बात रखी। अलग-अलग तकनीकी सत्रों में जीएसटी से संबंधित समस्याओं और उसके समाधान पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन अदिति जैन व धन्यवाद ज्ञापन आनंद पसारी ने किया। इस दौरान सीए जमुना शुक्ला, ओपी शुक्ला, संजय कुमार, अरविंद शुक्ला, अजय कुमार मिश्रा, राकेश राय, अधिवक्ता हर्ष सिंह, शिशिर बाजपेयी, शिशिर उपाध्याय आदि मौजूद रहे।