जीएसटी की उलझन में फंसे व्यापारियों की समस्याएं अभी कम नहीं हो रहीं। जीएसटी के सारे नियम अभी व्यापारी समझ भी नहीं सके हैं कि अब हर महीने तीन-तीन रिटर्न दाखिल करने का झंझट भी शुरू हो गया है। रिटर्न भरने के लिए दौड़भाग करें कि कारोबार।
वाणिज्यकर विभाग के कार्यालय में बनी जीएसटी हेल्प डेस्क पर पहुंचे रहे हर कारोबारी की जुबां पर यही सवाल है। जो कारोबारी रिटर्न नहीं भर पाते, उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी भी लगनी शुरू हो गई है। ऐसे में व्यापारी अपना काम-धंधा बंद कर वाणिज्य कर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
जीएसटी के तहत सभी व्यापारियों और उद्यमियों को हर महीने तीन रिटर्न भरने हैं। साल भर में एक फाइनल रिटर्न भी दाखिल करना है। इस तरह कुल 37 रिटर्न एक वर्ष में दाखिल करना है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि लगता है कि अब एक व्यक्ति केवल रिटर्न भरने के लिए लगाना पड़ेगा।
बड़े व्यापारियों और उद्यमियों के पास तो पूरा सेटअप होता है लेकिन हमारे पास तो ऐसी व्यवस्था नहीं है। वहीं रिटर्न दाखिल न होने या गड़बड़ी होने पर पेनाल्टी का भी प्रावधान है। अपनी समस्या लेकर कारोबारी वाणिज्य कर कार्यालय पहुंचते रहें, जहां अधिकारी उनको नियम-कानून समझाते हैं।
वाणिज्यकर वाराणसी जोन-1 के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 एके गोयल का कहना है कि जीएसटी रिटर्न को लेकर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी। जिसको रिटर्न भरने में समस्या हो रही हो, वह वाणिज्य कर विभाग की हेल्प डेस्क की मदद ले सकते हैं। रिटर्न भरने के लिए कई और सेंटर बनाए गए हैं। उनकी भी समस्या का निस्तारण यहीं से होगा।