वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्नातक तृतीय वर्ष का रिजल्ट प्रकाशित करना बड़ी चुनौती है। 19 अक्तूबर से बीएड में दाखिले की काउंसलिंग से पहले परिणाम जारी नहीं हुआ तो सैकड़ों छात्रों का दाखिला फंस सकता है। महाविद्यालयों में अब तक प्रायोगिक परीक्षाएं नहीं होने से समस्या बढ़ सकती है।
काशी विद्यापीठ के संबद्ध महाविद्यालयों की प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी नहीं होने के कारण छात्रों के परीक्षा परिणाम में देरी होने के आसार नजर आ रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से महाविद्यालयों को जल्द से जल्द प्रायोगिक परीक्षा कराने का निर्देश जारी किया जा चुका है। विश्वविद्यालय परिसर में भी प्रायोगिक परीक्षाएं लगातार कराई जा रही हैं। वही संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री और आचार्य की परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और मूल्यांकन कार्य भी शुरू हो चुका है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों की कापियां भी विश्वविद्यालय पहुंच चुकी हैं। आठ अक्तूबर तक रजिस्टर्ड डाक से बाहरी जिले और प्रदेशों की कापियां भी विश्वविद्यालय आ जाएंगी। उसके बाद ही मूल्यांकन का कार्य शुरू होगा।
काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य का कहना है कि प्रायोगिक परीक्षाएं कराने का दबाव महाविद्यालयों पर बनाया गया है। प्रायोगिक परीक्षा के अभाव में अगर किसी छात्र का रिजल्ट प्रभावित होता है तो जिम्मेदारी महाविद्यालय की होगी। रिजल्ट जल्द से जल्द निकालने के लिए परीक्षकों की संख्या भी बढ़ाई गई है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विशेश्वर प्रसाद का कहना है कि हमारा प्रयास है कि 19 अक्तूबर से पहले परीक्षा परिणाम जारी कर दिए जाएं। महाविद्यालयों से कापियों के संकलन का काम जारी है।