विद्यापीठ में मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय के प्रोजेक्ट के तहत एक्टिव म्यूजिक रूम और रिसेप्टिव म्यूजिक थेरेपी रूम का निर्माण किया जाएगा। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि पहले चरण में विश्वविद्यालय के अध्यापक, छात्र व कर्मचारियों के लिए संगीत की थेरेपी शुरू की जाएगी।
इसके बाद दूसरे चरण में लोगों के लिए भी विश्वविद्यालय में संगीत की ओपीडी का संचालन किया जाएगा। म्यूजिक थेरेपी के तहत मानसिक अवसाद, तनाव सहित कई अन्य मानसिक बीमारियों के मरीजों को इलाज की सुविधा मिलेगी।
शास्त्रीय संगीत, उपशास्त्री और लोकसंगीत से होगा इलाज
डॉ. दुर्गेश उपाध्याय के अनुसार हर राग, ताल और संगीत में रोग को मिटाने की अद्भुत क्षमता है। मरीजों का इलाज विशुद्ध शास्त्रीय संगीत, उपशास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के साथ ही बॉलीवुड के शास्त्रीय रागों पर आधारित संगीत से किया जाएगा। संगीत से रक्तचाप, दिल की बीमारियों में राहत, थकान और तनाव में राहत के साथ-साथ एकाग्रता भी बढ़ती है।
सुबह उठकर भजन और कर्णप्रिय संगीत सुनने से दिन भर व्यक्ति अच्छा महसूस करता है। मन में प्रसन्नता रहती है और अवसाद से भी राहत मिलती है। यदि किसी को रात में नींद न आए तो अपना मनपसंद मधुर संगीत को सुनें तो नींद अच्छी आती है।
पूरिया धनाश्री- अनिद्रा
मालकौंस- तनाव
शिवरंजनी-मन को सुखद अनुभूति
मोहिनी- आत्मविश्वास बढ़ाता है
भैरवी- ब्लड प्रेशर और तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण
पहाड़ी-स्नायु तंत्र को बेहतर
दरबारी कान्हड़ा- तनाव दूर
अहीरभैरव व तोड़ी- उच्च रक्तचाप
कान्हड़ा- अस्थमा
भैरवी- साइनस
तोड़ी-सिरदर्द व क्रोध