राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बृहस्पतिवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचीं। इस दौरान संग्रहालय होकर पुरातात्विक खंडहर परिषद के प्रवेश द्वार पर पहुंचीं, जहां सुरक्षा कारणों से शैक्षिक भ्रमण पर आए बच्चों को रोका गया था। बच्चों को धूप में खड़े देख उन्होंने खुद से पहले विद्यार्थियों को प्रवेश करवाया। जब तक सभी विद्यार्थी अंदर नहीं गए तब तक वो प्रवेश द्वार पर ही खड़ी रहीं। चार दिवसीय दौरे पर काशी आई राज्यपाल सारनाथ का भ्रमण कर एयरपोर्ट से रवाना हो गई।
बाल दिवस पर आए विद्यालयों के बच्चों से बातचीत की और समूह में फोटो खिंचवाई। मुजफ्फरपुर से आए सैलानी सविता गुप्ता कि दुधमुंही बच्ची को गोद में लेकर लाड-प्यार किया। सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि इसे भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त होगा। बौद्ध ज्ञान स्थली पहुंचकर राज्यपाल ने अवलोकन किया। संग्रहालय परिसर में सहायक पुरातत्व विद डॉक्टर नितेश सक्सेना ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्य हॉल में रखे राष्ट्रीय चिह्न शीर्ष सिंह देखा। इस दौरान सहायक पुरातत्व विद ने सारनाथ के इतिहास की विस्तृत जानकारी दी। संग्रहालय में बने गैलरी संख्या 4 और 5 में रखें हिंदू व जैन धर्म से संबंधित मूर्तियों की जानकारी ली। गैलरी नंबर 5 में रखी भगवान शंकर की अंधकासुर मर्दन विशालकाय मूर्ति देख उन्होंने आश्चर्य जताया।
पुरातात्विक खंडहर परिसर के अवलोकरन करने के बाद राज्यपाल मूलगंध कुटी मंदिर पहुंची। जहां महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव के मेधांकर थेरो व डॉ. बेनी माधव ने खाता भेंट कर स्वागत किया। मंदिर में भिक्षु के मेधांकर थेरो ने धम्मसूत्र का पाठ कर पूजा अर्चना की। वही मंदिर में रखे महाबोधी सोसायटी ऑफ इंडिया के संस्थापक व भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष का दर्शन, पूजन किया। इस दौरान रजनीश सिंह, राजेश यादव, पुरातत्व अधिकारियों के साथ ही भिक्षु महेंद्र नायक थेरों, धम्मरतन सहित अन्य लोग शामिल थे। वहीं सर्किट हाउस में उत्तर प्रदेशीय चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष रामचंद्र गुप्ता ने कर्मचारियों की समस्याओं के संबंध में ज्ञापन दिया।