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गंगा के बाढ़ क्षेत्र में ना हो कोई निर्माण : जांच समिति

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वाराणसी। गंगा के किनारे दो सौ मीटर के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण पर विधान परिषद की जांच समिति ने सख्त रुख अख्तियार किया है। लखनऊ में हुई बैठक के दौरान जांच समिति ने जिला प्रशासन, वीडीए और श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद को आगाह किया गया कि गंगा के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण नहीं होना चाहिए। वहीं गोदौलिया पर 28 अगस्त को संजय गांधी मार्केट के दुकानदारों और महिलाओं को धरने से उठाकर दो घंटे तक सड़क पर घुमाने और रात में ही उनको दुकानों से बेदखल करने पर भी जांच समिति ने सवाल उठाया।
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जांच समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गंगा के उच्चतम बाढ़ बिंदु दो सौ मीटर के अंदर को बाढ़ मैदान घोषित किया है। इस क्षेत्र में किसी तरह के निर्माण को सख्ती से रोकने का आदेश दिया था। वीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि पुराने घाटों के निर्माण व मरम्मत के लिए वीडीए की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी किंतु बाढ़ क्षेत्र में निर्माण के लिए कोई कमेटी नहीं बनाई गई थी। सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि किस कानून के तहत गोदौलिया के दुकानदारों को बेदखल किया गया और इस तरह से उनके साथ व्यवहार हुआ। हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया था कि दुकानदारों को बिना किसी कानूनी प्रक्रि या के बेदखल ना किया जाए। उसी निर्णय में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम को ताकीद किया था कि पार्क के उपयोग को पार्क ही रहने दिया जाए, बावजूद इसके पार्क को हटाकर अन्य निर्माण कैसे किया जाएगा। यदि गोदौलिया गंगा के बाढ़ क्षेत्र में आता है तो प्रतिबंधित स्थान पर निर्माण कैसे किया जाएगा। बैठक में यह भी पूछा गया कि क्या नगर निगम ने अपनी बैठक में प्रस्ताव करके स्मार्ट सिटी लिमिटेड को पार्क के बदले अन्य निर्माण का प्रस्ताव किया है या नहीं। संतोषपूर्ण जवाब नहीं देने पर सचिव नगर विकास कोे अगली बैठक में पूरी जानकारी के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया गया। बैठक की अध्यक्षता अरूण पाठक ने की। इस दौरान शतरूद्र प्रकाश, लक्ष्मण आचार्य, केदारनाथ सिंह, सीपी चंद्र, रवि शंकर, उदयवीर सिंह, संतोष यादव, जितेंद्र यादव, सुनील सिंह, साजन, जितेंद्र यादव भदौरिया ने हिस्सा लिया।
अगली बैठक में उपस्थित होने का दिया निर्देश
जांच समिति की अगली बैठक में प्रमुख सचिव आवास, प्रमुख सचिव नगर विकास, प्रमुख सचिव पर्यावरण, कमिश्नर, डीएम, नगर आयुक्त, उपाध्यक्ष वीडीए, श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को उपस्थित होने को निर्देश दिया है।
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