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Good Friday 2022: सूली पर चढ़े प्रभु यीशु तो रोया हर वो शख्स जो था वहां मौजूद, वाराणसी में निकली क्रूस यात्रा

Fri, 15 Apr 2022 05:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

गुड फ्राइडे का पर्व बेहद श्रद्धा भाव के साथ वाराणसी के सभी गिरजाघरों में मनाया गया। 
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प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में अर्पण करता हूं। हे पिता इनको क्षमा कर, क्योंकि यह नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं...। गुड फ्राइडे पर शुक्रवार को प्रभु यीशु के वचन फिर से गूंज उठे। वाराणसी में प्रभु यीशु के बलिदान को याद करने के लिए गुड फ्राइडे पर क्रूस यात्रा निकाली गई और प्रभु के सात वचनों को फिर से दोहराया गया।

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कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज कैथड्रल चर्च में क्रूस यात्रा निकाली गई जिसमें प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। यीशु को जो अमानवीय यातनाएं दी गईं थी उसका चित्रण देख लोग सहम उठे। वहां मौजूद हर शख्स की आंख से आंसू छलक उठा। शांति और प्रेम के लिए प्रभु यीशु के बलिदान को मसीही समुदाय ने गुड फ्राइडे के तौर पर याद किया। बिशप फादर यूजीन जोसेफ ने विशेष प्रार्थना की।  

गुड फ्राइडे का पर्व बेहद श्रद्धा भाव के साथ सभी गिरजाघरों में मनाया गया। मसीही समुदाय ने प्रभु यीशु के सूली पर चढ़ाए जाने के गम में दिन भर का उपवास रखा और उनके संदेशों को आत्मसात किया। वाराणसी के गिरिजाघरों में बड़ी संख्या में ईसाई समाज के लोग एकत्रित हुए। सूली पर चढ़े प्रभु ईसा मसीह को देख अनुयायों की आंखे छलक उठी। प्रभु यीशु पर की गई यातनाओं की दासतां सुन दर्द दुगना हो गया। चर्चों में विशेष प्रार्थना के साथ क्रूज आराधना की गई और जुलूस निकले।

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क्यों मनाते हैं गुड फ्राइडे

गुड फ्राइडे पर क्रूस यात्रा निकाली गई - फोटो : अमर उजाला
क्या आपको पता है इस दिन को  गुड फ्राइडे क्यों कहा जाता है क्योंकि इस दिन यीशु ने लोगों की भलाई के लिए अपनी जान दे दी थी और इस दिन शुक्रवार था। इसलिए इस दिन को गुड फ्राइडे का नाम दिया गया। इस दिन को शोक दिवस की तरह मनाया जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से हमेशा अप्रैल के महीने में पड़ता है।

बाइबिल के मुताबिक यह दिन ईसाईयों के लिए बेहद खास है। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है। जो ईस्टर सन्डे से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को आता है। शुक्रवार को सूली पर लटाकाए जाने के बाद उनकी मौत हो गई थी लेकिन अपनी मौत के तीन दिन बाद ईसा मसीह फिर जीवित हो उठे और उस दिन रविवार था। इस दिन को ईस्टर संडे कहते हैं।
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