जलस्तर गिरने से हरहुआ के चमाव पश्चिमपुर गांव में जवाब दे गया हैंडपंप।
बेतहाशा दोहन और पेड़ों की कटाई से भूगर्भ जल की स्थिति काफी भयावह हो गई है। जिले के आठ ब्लॉकों में से आराजीलाइन डार्क जोन से भी सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। जबकि दो ब्लाक डार्क जोन में और तीन ब्लॉक डार्क जोन में पहुंचने के कगार पर हैं। दो ब्लॉक ही ऐसे बचे हैं जहां भूजल की हालत ठीक है। कम से कम भूगर्भ जल विभाग के आंकड़े तो यही बताते हैं।
भूगर्भ जल का स्रोत कम से कम 60 फीट होना चाहिए। लेकिन इधर पांच से आठ वर्षो में लगातार भूगर्भ जल गिरता जा रहा है। जलनिगम के सहायक अभियंता आरसी ओझा के अनुसार अब 90 फीट पर पानी मिल रहा है। वह भी पीने योग्य नहीं है। 150 से 200 फीट की बोरिंग पर पानी उपलब्ध हो पा रहा है। जो ब्लॉक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं उन ब्लाकों में तीन से चार सौ फीट नीचे तक बोरिंग करनी पड़ रही है। जिले में प्रतिवर्ष दो से तीन मीटर भूगर्भ जल स्तर गिरता जा रहा है। यह बहुत ही खतरनाक है। आने वाले समय में पेयजल का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। भूगर्भ जल विभाग के मुताबिक आराजी लाइन ओवर एक्सप्लावटेड यानी काफी जल दोहन से अति खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। वहीं हरहुआ और पिंडरा ब्लॉक क्रिटिकल स्थिति में है। यहां भी भूजल काफी नीचे जा चुका है। उसे संरक्षित नहीं किया गया तो आने दो-तीन वर्षों में पेयजल की बड़ी समस्या खड़ी जाएगी।
वहीं बड़ागांव, चिरईगांव और चोलापुर ब्लॉक में जलदोहन पर रोक नहीं लगी तो अगले साल तक डार्क जोन घोषित हो जाएगा। ये ब्लाक भी डार्क जोन के करीब हैं। जिले में सेवापुरी और काशी विद्यापीठ ब्लाक में भूगर्भ जल की स्थिति ठीक है।
आराजीलाइन ब्लाक में गिरते जलस्तर से किसान और वहां की जनता काफी परेशान है। सामाजिक कार्यकर्ता नंदलाल मास्टर, नारायण प्रताप सिंह तथा गुरुकुल साई संस्था की शारदा त्रिवेदी और सद्भावना संरक्षण समिति की सुनीता सिंह का कहना है कि वाटर हार्वेंस्टिंग, अधिक से अधिक पौधरोपण होने चाहिए। सार्वजनिक कुओं और तालाबों को संरक्षित करने की जरूरत है। इस पर सरकार को सख्त होना चाहिए। तभी गिरते भूजल को बचाया जा सकता है। लेकिन, लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद शासन और प्रशासन स्तर पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो योजनाएं हैं जल संरक्षण की, वो भी ठीक से लागू नहीं की जा रही हैं।
जिले में सेवापुरी और काशी विद्यापीठ को छोड़कर अन्य छह ब्लॉकों में नई बोरिंग करने और पंपिंग सेट लगाने पर पूरी तरह से रोक है। इसके बाद भी धड़ल्ले से लगातार नए पंपिंग सेट और बोरिंग कराई जा रही है। इस पर न तो जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही भूगर्भ जल विभाग का। इस पर कड़ाई से प्रतिबंध नहीं लगा तो आने वाले समय में पानी के लिए हाहाकार मचेगा।