घटना की जानकारी पाकर परिजन और ग्रामीण मौके पर नारेबाजी करने लगे। सूचना पाकर हरहुआ पुलिस चौकी का एक सिपाही सादे कपड़े में मौके पर पहुंचा। ग्रामीण उसे पहचान नहीं पाए और उसकी पिटाई कर दी। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया और छात्रा का शव पुलिस को सौंपने से इन्कार कर दिया।
पुलिस और गांव के गणमान्य लोगों द्वारा उचित मुआवजा और कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ। परिजनों ने बताया कि छात्रा एक भाई और दो बहनों में सबसे छोटी थी। उसके पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि ओवरलोड ट्रक गांव के रास्ते पर कैसे आ गया। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत खोदे गए गड्ढों को लेकर भी लोग नाराज दिखे।
छात्रा के स्कूल के प्रधानाध्यापक गुलाब चंद ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि बालिका स्कूल में पढ़ने आई थी। दवा खाने की बात कह कर मध्यावकाश में अपने घर गई थी। उसे हम किसी के साथ भेजने की सोच रहे थे, इसी बीच वह अकेले ही साइकिल से निकल गई। हादसे की जानकारी मिलने के बाद स्कूल में छुट्टी कर दी गई।