देश में सबसे अधिक जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) पंजीकरण उत्पाद वाला क्षेत्र पूर्वांचल है। अब इस कड़ी में तीन और उत्पाद जुड़ सकते हैं। वाराणसी के स्टोन अंडरकट वर्क, गाजीपुर के जूट वालहैंगिंग और चुनार के सैंड स्टोन (बलुआ पत्थर मूर्तिकार) शिल्पियों ने इसके लिए जीआई पंजीयक रजिस्ट्रार चिन्नाराजा नायडू के सामने दस्तावेज सौंपकर दावेदारी पेश की है।
परेड कोठी के पास एक होटल में मंगलवार को ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री कार्यालय के सहयोग से कार्यशाला आयोजित थी। इसमें चिन्नाराजा नायडू ने कहा कि आने वाले समय में वाराणसी समेत देश के जीआई पंजीकृत उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में तैयार कर मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। वाराणसी हस्तशिल्प उत्पादों के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
यहां से निर्यात बढ़ने की संभावना प्रबल होती जा रही है। हस्तशिल्पियों को डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया से भी जोड़ने की तैयारी है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार हो सके और अधिक से अधिक आर्डर प्राप्त हों। नाबार्ड के डीडीएम सुशील तिवारी ने कहा कि विपणन एवं क्लस्टर योजना में सहयोग दिया जाएगा। संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश सिंह ने विश्वास दिलाया कि पूर्वांचल के शिल्पियों को जीआई का विशेष लाभ प्राप्त होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।