उन्होंने बताया कि लद्दाख के जहां सिर्फ तीन जीआई थे, अब वहां नौ प्रक्रिया में हैं। झारखंड में एक जीआई है, अब नौ प्रक्रिया में शामिल हैं। त्रिपुरा में चार जीआई उत्पाद हैं, अब 21 जीआई प्रक्रिया में आ चुके हैं। अरुणाचल में 20 जीआई हैं, जो कि अब 24 जीआई फाइल हो चुके हैं।
मणिपुर में सात जीआई, आसम में 10 जीआई, बिहार में नौ जीआई और नौ प्रक्रिया में हैं। उत्तराखंड में 27 जीआई हैं। छत्तीसगढ़ में एक जीआई और अब नौ प्रक्रिया में हैं। हिमाचल में एक जीआई और अब प्रक्रिया में चार है। मध्य प्रदेश में 10 जीआई, राजस्थान में 12 जीआई और 20 प्रक्रिया में है। गुजरात में 9 जीआई और 18 प्रक्रिया में आ चुके हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक साल में 100 से अधिक जीआई फाइल किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जीआई टैग का लाभ यह है कि उत्पादकों को कानूनी सुरक्षा मिलती है। उत्पाद की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
जीआई टैग को ऐसे समझें
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि भौगोलिक संकेतक या जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) एक ऐसा चिह्न है, जो किसी उत्पाद को विशेष भौगोलिक स्थान या मूल से जोड़ता है। यह टैग उन उत्पादों को दिया जाता है, जो उस विशेष स्थान के भौगोलिक वातावरण, परंपरा या संस्कृति से मेल खाती हैं और इस वजह से उनमें विशिष्ट गुण होते हैं। उत्पाद की गुणवत्ता और पहचान को बढ़ावा देना, उत्पाद को दूसरों से अलग और विशिष्ट बनाना, उत्पाद को स्थानीय अर्थव्यवस्था में बढ़ावा देना और उत्पाद को नकली या खराब नकल से बचाना है।