जैसे इस बात की जानकारी उनके गांव और उनकी मूल शाखा के लोगों की हुई उनमें खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बलिया और मिर्जापुर जिले में प्रचारक का दायित्व निभा चुके दुर्गा प्रसाद ने बताया कि श्रीराम की लगन, शीलता और कार्य के प्रति गंभीरता ने उन्हें भीड़ से भी अलग रखा। उन्होंने बताया कि जखनिया कस्बे में शिव मंदिर पर लगने वाली महावीर प्रभात शाखा के स्वयंसेवक रहे श्रीराम का इस दायित्व पर पहुंचना शाखा के लिए गर्व की बात है।
घोर विपत्ति भीसंकल्प से डिगा नहीं पाई
बचपन से ही अपने संकल्प के प्रति दृढ़ संकल्पित श्रीराम का पूरा परिवार सिद्धपीठ हथियाराम मठ का परंपरागत शिष्य रहा है। 1990 के दशक से संघ के प्रति समर्पित हुए श्रीराम के सामने 2005 में उस समय उनके सामने बड़ा संकट आ गया, जब उनके बड़े भाई व तत्कालीन गाजीपुर भाजपा किसान मोर्चा जिला मंत्री सभाजीत सिंह की मंदिर में पूजा करते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भी वह शाखा से जुड़े रहे।