दशाश्वमेध घाट पर गंगा में साढ़े सात किलोग्राम बायोरेमीडिएशन का छिड़काव किया गया। इससे गंगा का पानी तेजी से साफ हो रहा है। इसकी मात्रा एक हजार लीटर पानी में ढाई किलोग्राम लगती है। तकनीकी अधिकारी ने बताया कि 2019 के कुंभ में प्रयागराज में कई सारे कुंड व नालों का पानी शोधित करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। अभी तक इसका कोई भी नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला है। गंगा स्नान से किसी व्यक्ति को भी स्वास्थ्य सबंधी समस्या नहीं होगी।
नमामि गंगे के प्रवक्ता ने बताया कि गंगा निर्मलीकरण के लिए जितने भी एसटीपी बने हैं सभी की निगरानी दिल्ली से ऑनलाइन हो रही है। वर्तमान में 50 एमएलडी शोधन क्षमता का एसटीपी रमना का ट्रायल हो रहा है। नगवां नाला से करीब 17 एमएलडी मलजल एसटीपी तक जा रहा है। इसी प्रकार 10 एमएलडी शोधन क्षमता के एसटीपी रामनगर का भी ट्रायल किया जा रहा है। असि नदी से रोजाना सात करोड़ लीटर सीवेज ट्रीटमेंट के लिए रमना एसटीपी भेजा जा रहा है।