24 सौ मंत्रों का है लक्ष्य
गायत्री लेखन साधना में कोई भी सनातनधर्मी अपना योगदान कर सकता है। गायत्री लेखन साधना में प्रत्येक साधक के लिए न्यूनतम 24 सौ गायत्री मंत्र लेखन करने का लक्ष्य रखा गया है। पांच अप्रैल के बाद शामिल होने वाले साधकों के लिए न्यूनतम एक हजार गायत्री महामंत्र लेखन का लक्ष्य है।
गायत्री मंत्र का अर्थ
भगवान सूर्य की स्तुति में गाए जाने वाले इस मंत्र का अर्थ है, उस प्राण स्वरूप, दु:खनाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप परमात्मा को हम अन्त:करण में धारण करें। परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।
मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या
गायत्री मंत्र के पहले नौ शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं
ऊं- प्रणव
भूर - मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुव: - दुख़ों का नाश करने वाला
स्व: - सुख़ प्रदाण करने वाला
तत - वह
सवितुर - सूर्य की भांति उज्ज्वल
वरेण्यं- सबसे उत्तम
भर्गो - कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य - प्रभु
धीमहि - आत्म चिंतन के योग्य ध्यान
धियो - बुद्धिए
यो - जो
न: - हमारी
प्रचोदयात् - हमें शक्ति दें
कब करें गायत्री मंत्र का जाप
यूं तो इस बेहद सरल मंत्र को कभी भी पढ़ा जा सकता है लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका दिन में तीन बार जप करना चाहिए।
- प्रात:काल सूर्योदय से पहले और सूर्योदय के पश्चात तक
- दोबारा दोपहर में
- फिर शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले जप शुरू करना चाहिए
गायत्री मंत्र के फायदे
हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को विशेष मान्यता प्राप्त है। कई शोधों से यह भी प्रमाणित हुआ है कि गायत्री मंत्र के जाप से कई फायदे हैं, जैसे मानसिक शांति, चेहरे पर चमक, खुशी की प्राप्ति, गुस्सा कम आना है और बुद्धि तेज होना। गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार होता है। शरीर निरोग बनता है और इंसान को यश, प्रसिद्धि और धन की प्राप्ति भी होती है।
बना चुके हैं विश्व रिकॉर्ड
इसके पूर्व गुजरात के मंगलदास ईश्वरदास कडिया ने 2019 में गायत्री मंत्र लेखन अभियान में विश्व रिकॉर्ड बनाया था। मंगलदास ने 2013 से 2019 के बीच सात लाख बहत्तर हजार आठ मंत्रों का लेखन किया। उन्होंने 322 पुस्तिकाओं का अनवरत लेखन किया है।