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गैस शवदाह गृह नहीं लकड़ी से अंतिम संस्कार पर जोर

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वाराणसी। हरिश्चंद्र घाट स्थित गैस शवदाह गृह में बुधवार से दूसरी मशीन भी शुरू हो गई। घाट पर अब पहले जैसी मारामारी नहीं है। लोग मशीन के बजाय लकड़ी पर ही शव जलाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गैस शवदाह गृह के प्रभारी अधिशासी अभियंता अजय राम ने बताया कि कोरोना से मरने वाले कुल 26 लोगों के शवों का संस्कार निशुल्क कराया गया। 11 मशीन और बाकी लकड़ियों पर जलाए गए। शव लेकर पहुंचने वालों ने गैस के बजाए पर्ची कटवाकर लकड़ी से संस्कार कराया। नगर निगम की ओर से निशुल्क संस्कार की सुविधा के चलते लोगों ने लकड़ी का विकल्प चुना है। बुधवार को सीएनजी शवदाह गृह में 26 पर्चियां काटी गईं। केवल 11 संस्कार गैस से किया गया। दोनों गैस चैंबर शुरू होने के बाद भी भट्टियां खाली रहीं। परिजन लंबे इंतजार और संक्रमण का खतरा ज्यादा होने के बाद भी लकड़ी का विकल्प चुन रहे हैं। कुछ दिनों पहले तक शवों की संख्या ज्यादा होने व लकड़ी की मनमानी कीमत वसूले जाने के कारण ज्यादातर लोग गैस से शवदाह करा रहे थे।
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हरिश्चंद्र घाट पर बुधवार को लकड़ी से 60 से ज्यादा शवों का संस्कार हुआ। मणिकर्णिका घाट पर यह संख्या 120 से अधिक रही। सामने घाट स्थित अस्थाई घाट पर 10 शवों का संस्कार हुआ। जोनल अधिकारी रामेश्वर दयाल ने बताया कि सामने घाट में छह कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार निशुल्क कराया गया।
उधर, नगर आयुक्त गौरांग राठी ने हरिश्चंद्रघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह का निरीक्षण किया। शवदाह स्थल की नित्य सफाई सैनिटाइजेशन एवं फॉगिंग कराने, सफाई कर्मचारियों एवं रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कर्मियों को पीपीई किट देने को कहा। कई कार्मिकों को एन 95 मास्क भी वितरित किया गया ।
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