पूर्वांचल की जेलों में अपना वर्चस्व स्थापित करने की जंग में पगली घंटी बजती रही है। मारपीट, तोड़फोड़ और बंदी रक्षकों से लेकर जेलर तक पर अपना प्रभाव छोड़ने को लेकर कुख्यात कुछ भी कर गुजरते हैं। चित्रकूट जेल में गैंगवार नया नहीं है। इसके पूर्व दो अप्रैल 2016 में जिला जेल चौकाघाट में भी बंदियों ने मारपीट का आरोप लगाकर जेल को पांच से छह घंटे तक अपने कब्जे में रखा था।
उस दौरान डिप्टी जेलर को बंधक बनाकर बंदियों ने पिटाई की थी। इसके बाद भी बंदियों के बीच आपस में टकराहट होती रही। 2018 में भी बंदियों ने वर्चस्व की जंग में जेल के माहौल को अशांत कर दिया था। सियासी रसूख वाले बंदियों को जेल के अंदर मादक पदार्थ, मोबाइल चलाने की छूट को लेकर भी माहौल तल्ख रहता है। वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर और मिर्जापुर जेल में वर्चस्व की लड़ाई चलती है।
जेल के अंदर कैदियों की बात न मानने का भी अंजाम बुरा होता है। जेल के अंदर माफिया मुन्ना बजरंगी की शर्तों को न मानने पर चौकाघाट जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की 23 नवंबर 2013 को पांडेयपुर क्षेत्र में जिम से बाहर निकलने के दौरान अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी।
बताया जाता था कि मुन्ना बजरंगी के शार्प शूटर अमजद, वकील पांडेय, राजेश चौधरी और रिंकू सिंह ने डिप्टी जेलर की हत्या की थी, जिसमें अमजद व वकील पांडेय को प्रयागराज में एसटीएफ ने चार मार्च 2021 को मुठभेड़ में मार गिराया था।
विधायक मुख्तार अंसारी के साथ मिलकर काम करने वाले मेराज पर पहला मुकदमा वर्ष 2002 में हत्या व हत्या का प्रयास का सिगरा थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 में ही अवैध असलहा और मादक पदार्थ रखने में दो मुकदमे कैंट थाने में दर्ज हुए थे। इसके बाद भी मेराज का नेटवर्क अवध क्षेत्र में विस्तारित होने लगा और अवैध असलहा रखने के मामले में रायबरेली कोतवाली में दो बार मुकदमा दर्ज हुआ था। जैतपुरा थाने में भी साल दर साल तीन मुकदमे मेराज पर दर्ज हुए थे।
मुख्तार का वरदहस्त होने के कारण जेल के अंदर भी मेराज बहुत दिन तक नहीं रह पाता था। चौक, सिगरा और कैंट थाने में मेराज पर अधिकतर मुकदमे अवैध असलहा रखने के आरोप में ही दर्ज हुए थे। मेराज पर आखिरी मुकदमा कैंट थाने में 23 जनवरी 2021 में धोखाधड़ी का दर्ज हुआ था। पुलिस डोजियर के अनुसार मेराज पर कुल 20 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।