फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चित्रकूट जेल गैंगवार: मेराज की हत्या से बाहुबली मुख्तार के आर्थिक साम्राज्य पर तगड़ी चोट, पढ़ें- सिंडिकेट का सरगना बनने की कहानी

Sat, 15 May 2021 01:10 AM IST
उत्पल कांत शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी

सार

चित्रकूट जेल में मारा गया मेराज अहमद ही वो शख्स था जो  पूरे पूर्वांचल में बाहुबली मुख्तार अंसारी के अवैध कारोबार को कंट्रोल करता था। मुख्तार की सियासी जमीन मजबूत करने में भी उसकी बड़ी भूमिका थी. 
विज्ञापन
मुख्तार अंसारी, भाई मेराज। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गिरोह के सदस्य मेराज अहमद की जेल में हुई हत्या के बाद मुख्तार अंसारी सहित कई बाहुबलियों के आर्थिक साम्राज्य पर तगड़ी चोट लगेगी। कारण, बाहुबली मुख्तार अंसारी के अवैध कारोबार को मेराज ही पूरे पूर्वांचल में संचालित करता था। मुख्तार अंसारी को बसपा से जोड़ने और पहली बार विधायक बनाने में मेराज ने अहम भूमिका निभाई थी।

विज्ञापन


इसी के बाद से वह मुख्तार अंसारी का बेहद करीबी हो गया था और मछली, कोयला और जमीनों के अवैध कारोबार पर मुख्तार के चेहरे के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े होने के साथ ही मेराज अहमद कुख्यात मुन्ना बजंरगी का बेहद करीबी था।

वह जमीन पर कब्जा और कोयला के अवैध कारोबार के साथ ही रंगदारी और नशे के कारोबार से भी जुड़ गया था। इसके साथ ही वह वाराणसी के अलावा चंदौली के कोयला कारोबार, मिर्जापुर के अवैध खनन और गाजीपुर के मछली कारोबार के सिंडिकेट का सरगना बन गया। मुख्तार अंसारी के कारोबार को भी मेराज ने संभालना शुरू कर दिया और जरायम जगत में उसने अपनी अलग पहचान बना ली।
विज्ञापन


जून 2006 में तत्कालीन एसएसपी ने कई थानों की फोर्स के साथ मेराज के घर पर छापा मारकर हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी थी। हालांकि बाद में न्यायालय से वह बाइज्जत बरी हो गया। जेल से छूटने के बाद मेराज अहमद पूर्वांचल में दूसरे सक्रिय गिरोह से मुख्तार गिरोह के बीच का माध्यम बन गया। बसपा से सक्रिय राजनीति में जुटे मेराज ने पूर्वांचल में सरकारी तालाबों में प्रतिबंधित मांगूर मछली का उत्पादन शुरू कराया था और उसका सीधे एक्सपोर्ट शुरू किया था।

असलहा लाइसेंस बनवाने का था मास्टरमाइंड

मेराज अहमद को फर्जी दस्तावेजों पर असलहों का लाइसेंस बनवाने का मास्टरमाइंड माना जाता था। अक्तूबर 2020 में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। छानबीन में फर्जी तरीके से बनवाए गए नौ लाइसेंसी पिस्टल और रायफल की जानकारी हुई थी। साल 2015 में मुन्ना बजरंगी के खास तारिक की लखनऊ में गोली मारकर हत्या की गई थी।

तारिक के घर से पुलिस ने लाइसेंसी रायफल बरामद की थी, जिसका लाइसेंस फर्जी पाया गया। बताया जा रहा है कि इस रायफल का लाइसेंस भी मेराज ने ही नागालैंड से बनवाया था। फर्जी पते पर असलहा लाइसेंस जारी होने के आरोप में जेल जाने के बाद विकास प्राधिकरण ने उसके अवैध निर्माण को ढहाया था।

बाहुबली धनंजय और प्रदीप की कड़ी था मेराज

बनारस में तैनात रहे एक आईपीएस अधिकारी बताते हैं कि मेराज अहमद पूर्वांचल के बाहुबलियों के बीच की कड़ी बन गया था। जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह और रिटायर्ड डीएसपी के बेटे प्रदीप सिंह की दोस्ती में मेराज ने कई साल पहले अहम भूमिका निभाई थी।

मगर, धनंजय और प्रदीप के बीच तकरार के बाद मेराज ने प्रदीप सिंह का हाथ थामा था। वर्ष 2018 में बागपत जेल में मुन्ना बजंरगी की हत्या में मेराज अहमद का नाम भी आया था। हालांकि जरायम जगत में यह भी चर्चा थी कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसके गैंग की कमान मेराज ने थाम ली थी। इससे पहले वह गैंग के लिए असलहों का इंतजाम करता था।

अनिल राय हत्याकांड में मेराज को बनाया था आरोपी

मुन्ना बजरंगी के करीबियों में शुमार रहे मेराज का नाम मलदहिया पर काशी विद्यापीठ के छात्रनेता रहे अनिल राय हत्याकांड में भी आया था। मेराज को साजिश का हिस्सा माना गया था और मुन्ना बजंरगी ने वर्ष 2002 में भाजपा नेता अनिल राय की हत्या की थी। इससे पहले 1997 में अनिल के बड़े भाई सुनील राय और राम प्रकाश पांडेय की भी हत्या मुन्ना बजरंगी ने की थी।
विज्ञापन

मेराज के कहने पर विहिप नेता का अपहरण और हत्या

पूर्वांचल में तैनात रहे एक पूर्व आईपीएस ने बताया कि अवैध कोयला कारोबार संभालने के बाद मेराज पूरे धंधे पर मुख्तार अंसारी का कब्जा जमाने में जुट गया था। उसने विहिप नेता नंद किशोर रूंगटा को अपने धंधे का सबसे बड़ा अवरोध बताया। 1997 में विहिप के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और कोयला कारोबारी से रंगदारी मांगी गई थी।

मना करने पर मुख्तार के गुर्गों ने रूंगटा का अपहरण किया और फिरौती की रकम लेने के बाद हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि उसने रूंगटा को कोयला कारोबार छोड़ने को भी कहा था। नहीं मानने पर उनकी हत्या की। हालांकि मुख्तार गैंग के सदस्य रहे इनामी अताउर्रमान उर्फ बाबू और शहाबुद्दीन को इसका आरोपी बनाया था। सीबीआई में जांच के बाद दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें