सैदपुर में आचमन लायक भी नहीं बचीं पतित पावनी गंगा
संवाद न्यूज एजेंसी
औड़िहार। लगातार प्रदूषण का शिकार हो रही गंगा का जल अब आचमन करने से भी लोग घबरा रहे हैं। वाराणसी की तरह सैदपुर में भी गंगा के जल का रंग बदरंग हो चुका है और पानी से दुर्गंध भी आती है। वैसे तो गंगा प्रयागराज के पहले से ही प्रदूषित दिखाई पड़ती हैं। उसका असर यहां भी है। इसके बावजूद यहां औड़िहार के बाद सैदपुर नगर क्षेत्र में कुल सात नालों का पानी सीधे आकर गंगा में मिलता है। इन नालों से घरों का गंदा पानी आकर गंगा को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया है। लगभग यहां के सभी प्रसिद्ध घाटों पर अंदर कई फीट तक पानी में दुर्गंध और मटमैला पानी होने कारण स्नान करने से भी लोग परहेज कर रहे हैं।
यहां जल में घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर 8 के ऊपर माना जा रहा है।क्षेत्रीय जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर वर्ष नालों को व्यवस्थित करने और इसके पानी को फिल्टर कर गंगा में छोड़े जाने का उपक्त्रस्म बनाता है लेकिन अभी तक इस संदर्भ में कोई पहल नहीं हो सकी है। इससे गंगा में स्नान करने वाले स्नान प्रेमियों, साधु संतों के अलावा घाटों के किनारे बने मंदिरों पर इस जल से जलाभिषेक करने में भी लोग कतराने लगे हैं।मार्च-अप्रैल आते आते गंगा के जल की स्थिति और भी बदतर हो जाएगी।
अशोक पांडेय, रीना वर्मा, सुषमा देवी,गौरव बरनवाल सहित अन्य लोगों का कहना है कि जब तक गंगा में नालो से गंदे पानी का आना बंद नहीं होगा तब तक गंगा मैली ही रहेगी। नारों से गिरने वाले पानी को शोधित कराएं बिना समस्या से निजात मिलना मुश्किल है। लाख प्रयत्न के बावजूद भी गंगा के किनारे कूड़े कचरे का ढेर लगा रहता है। घाटों पर पॉलिथीन एवं गंदे कपड़े बिखरे रहते हैं। अकारण फैल रही गंदगीकी समुचित व्यवस्था न किया जाना गंगाजल को प्रभावित कर रहा है।