सभी प्रमुख घाटों पर पंडों की चौकियां सबसे ऊपरी प्लेटफार्म पर लगाई जा चुकी हैं। वहीं नाविकों ने छोटी नौकाओं को घाट किनारे की बस्तियों में रखना शुरू कर दिया है। बड़ी नौकाओं की निगरानी के लिए माझी समाज के सदस्य दिनरात घाट किनारे ही जमे हुए हैं।
इनके अलावा घाट पर जिनकी दुकानें अब तक जलमग्न हो गई हैं, उनकी रोजी-रोटी पर कोरोना काल में दोहरी मार पड़ी है। इसके चलते उनकी माली हालत और भी खराब हो गई है।