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मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी नहीं हुआ दवाओं का छिड़काव, जाते-जाते गंदगी का अंबार छोड़ गईं नदियां

Sun, 25 Aug 2019 03:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वरुणा पार इलाके में फैली गंदगी। - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गंगा और वरुणा नदी में आई बाढ़ का खुद मोटरबोट पर बैठकर निरीक्षण किया और बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। इसके बाद भी राहत सामग्री तो दूर जिन इलाकों से पानी निकल गया है, उन क्षेत्रों में दवाओं का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में गंदगी और बदबू से संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

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गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा भी उफान पर हो गई थीं। इसके चलते वरुणा के तटवर्ती इलाके, कोनिया, मीराघाट, नक्खी घाट, सराय मोहाना, सलारपुर आदि क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर गया था। अब जाते-जाते नदियां गंदगी और संक्रमण का अंबार छोड़ गई हैं।

शुक्रवार को आए मुख्यमंत्री ने सभी को राहत सामग्री देने की बात कही थी, लेकिन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से अब तक उन्हें किसी भी प्रकार की राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। मदद के नाम पर प्रशासन की ओर से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में केवल नाव संचालन की व्यवस्था की गई है। तहसीलदार रविशंकर यादव ने बताया कि 29 बाढ़ राहत केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें बाढ़ पीड़ितों के लिए खाने के साथ ही उनकी दैनिक जरूरतों से जुड़े अन्य सामान रखे गए हैं।

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इन क्षेत्रों में है संक्रमण का खतरा :
शनिवार को नक्खीघाट, हिदायतनगर, दीनदयालपुर, अंसारनगर, मीरा घाट, कोनिया इलाके में रहने वाले लोग अपने घरों में वापस पहुंच गए हैं। नक्खी घाट निवासी ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद उनके मड़ई में करीब चार फीट मोटी कीचड़ की परत जमी हुई है और कूड़े का ढेर लग गया है। अंसारनगर निवासी पनारू, मिल्लत नगर निवासी पप्पू कुमार और अजहरुद्दीन ने बताया कि पांच दिन तक बाढ़ के पानी में वह अपने परिवार के साथ मकान के दूसरे तल पर थे। 

मीराघाट लाइव :
दोपहर के तीन बजे जब अमर उजाला की टीम मीराघाट तालीम नगर पहंची तो वहां नदियों के छोड़े हुए कचरे से स्लाटर हाउस जैसी बदबू आ रही थी। गलियों और घरों में कीचड़ तो लोगों ने साफ कर दिया था, लेकिन गंदगी के चलते पूरा क्षेत्र बजबजा रहा था। किसी के रसोई तो किसी के बेडरूम तक पानी पहुंच गया था। यही नहीं कुछ बुनकरों के घरों में पावरलूम भी पानी से डूब गए थे। मोहल्ले की सैयदा बीवी ने कहा कि इस क्षेत्र में पीने के पानी की सबसे अधिक समस्या हो गई है। गंदा पानी आ रहा है। खूशनूर अली, इलियास, हुश्न बानो और नूरजहां ने बताया कि अब तक कोई भी यहां देखने नहीं आया है। प्रशासन केवल दवाओं का छिड़काव कर दे तो भी बेहतर हो जाएगा।

सारनाथ क्षेत्र में भी समस्याओं का अंबार :
सारनाथ। वरुणा नदी का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। कुछ क्षेत्रीय लोग अपने मकानों में वापस आ गए हैं। लेकिन गंदगी के अंबार से रहना मुश्किल हो गया है। पूरा क्षेत्र बदबू से ग्रस्त है। सलारपुर, पुलकोहना, पुरानेपुल क्षेत्र में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले लोग अभी भी अपने मकानों में वापस नहीं जा सके हैं। लोग अपना मकान छोड़ किराए के मकानों में शरण लिए हुए हैं।

पुल कोहना भट्टा निवासी अनारू ने बताया कि मेरा पूरा मकान वरुणा के पानी में डूब गया था। अब जलस्तर कम हुआ है तो मकानों से पानी निकाल रहे हैं लेकिन अभी 10 से 15 दिन रहने योग्य नहीं रहेगा। वहीं वैजनाथ ने बताया कि जलस्तर कम हो रहा है। लेकिन गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिससे ढेर सारे मच्छर पैदा हो गए हैं और गंदगी से पूरा क्षेत्र बजबजा रहा है। नगर निगम के लोग दवा भी छिड़कने नहीं आ रहे हैं।
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सीएमओ डॉ वीबी सिंह ने बताया कि गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों से नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को अलर्ट किया गया है। यहां दवाओं का छिड़काव कराए जाने, लोगों की जांच कर, जरूरी दवाईयां देने के साथ ही अन्य सुविधाओं की मानीटरिंग की जा रही है।
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