ब्रह्म मुहूर्त में अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर गंगा सप्तमी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। मां गंगा को धूप, दीप, पुष्प आदि नैवेद्य आदि अर्पित कर पूजा करनी चाहिए। गंगा उत्पत्ति की कथा का श्रवण करना चाहिए। श्रीगंगा स्तुति और श्रीगंगा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दान-पुण्य भी करना चाहिए।
शिवलिंग पर गंगाजल के साथ चढ़ाएं पांच बेलपत्र
गंगा सप्तमी के दिन लोटे में गंगाजल भरकर उसमें पांच बेलपत्र डालें। शिवलिंग पर एक धारा से यह जल अर्पित करें। ओम नमः शिवाय का जाप करते रहें। चंदन, पुष्प, प्रयात अक्षत, दक्षिणा आदि अर्पित करें। हिंदू धर्म में गंगा को मां का रूप माना गया है। मृत्यु के बाद मानव की अस्थि कलश इसमें विसर्जित करने से जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।
शास्त्रों में वर्णन है कि मां गंगा तीनों लोकों में बहती हैं। इसलिए उन्हें त्रिपथगामिनी कहा जाता है। स्वर्ग में मंदाकिनी और पाताल में भागीरथी कहा जाता है। पृथ्वीलोक पर मां गंगा या जाह्नवी के नाम से जाना जाता है। गंगाजल का प्रयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी अनुष्ठानों व संस्कारों में जरूरी माना गया है।