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असि पर पहला कब्जा गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का

Mon, 25 Apr 2016 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी में असि नदी की तलहटी पर कब्जे की शुरुआत सबसे पहले गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने की। अस्सी मुहल्ले में ही नदी की तलहटी को पाट कर सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) और आवासीय परिसर बनाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण इकाई की देखादेखी आसपास के लोगों ने भी नदी के पेटे को पाट कर कब्जा कर लिया। जहां नदी के अस्तित्व को मिटाने के लिए एसपीएस के निर्माण के साथ ही नाला बनाया गया, वहां अब भी तलहटी 20 मीटर से अधिक बची हुई है और वहां जमा हो रहे गंदे पानी में इन दिनों मुहल्ले की भैंसें लोट रही हैं।
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कब्जा कर बसाई गई कॉलोनियों के बीच की गलियों, नदी के बीच बने पुलों और मोड़ी गई धाराओं के पास अब भी असि नदी के चौड़े किनारों के प्रमाण जिंदा और सलामत हैं। मुमुक्षु भवन जहां लोग मोक्ष की धारणा से काशी में देहावसान के लिए प्रवास करते हैं। घर-बार छोड़ कर वहां जीवन का आखिरी पड़ाव पूरा करते हैं, वह दरअसल असि नदी का उत्तरी तट है। मोक्ष की धारणा से ही असि नदी तट पर मुमुक्षु भवन का निर्माण कराया गया। लेकिन गंगा एक्शन प्लान के प्रथम चरण की शुरुआत के समय 1986 में इस धारणा को खत्म किया जाने लगा। मुमुक्षु भवन के पास ही नदी की तलहटी में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने 50 एमएलडी क्षमता का सीवेज पंपिंग स्टेशन बनवा दिया। नदी को नाला में परिवर्तित करने के लिए ईंट से जोड़ाई कर चार फीट का नाला भी उसी तलहटी में अलग से बनवा दिया गया।


अब इस पंपिंग स्टेशन में जंग लग चुकी है। स्टेशन परिसर में कर्मचारी गाय, बकरी और सुअर पालन कर रहे हैं। भदैनी के पार्षद गोविंद शर्मा बताते हैं कि तलहटी के बचे हिस्से में गंदा पानी जमा होकर सड़ने से अस्सी मुहल्ले में दुर्गंध फैल रही है। लोग बीमार हो रहे हैं। गंगा निर्मलीकरण समेत नदी स्वच्छता के लिए काम कर रहे आत्मा राम दुबे का कहना है कि असि के साथ खिलवाड़ अब भी जारी है। पांच साल पहले शहर के बड़े हिस्से का जो अवजल शिवाला नाले से गंगा में बहता था, उसे मोड़कर असि में गिरा दिया गया है। जबकि इस नाले को रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाना था। अब तीन करोड़ लीटर यानी 30 एमएलडी गंदा पानी और असि नदी में बहाया जाने लगा है। डीरेका, बीएचयू समेत शहर के अन्य नालों से पहले से ही नौ करोड़ लीटर अवजल रोज गंगा में बहता था।
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