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बनारसी लंगड़ा आम... अब ढूंढते रह जाओगे

Mon, 25 Apr 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी में वरुणा और अस्सी नदी के बाद अब बनारसी लंगड़े आम पर भी संकट मंडराने लगा है। जिस कचहरी स्थित कंपनीबाग उद्यान में लंगड़ा आम के मातृ पौध से इस प्रजाति की नई पौध तैयार की जाती है, अब उसी को उजाड़ने की तैयारी है। दरअसल आवास विकास परिषद शहर में जाम की समस्या खत्म करने और पार्किंग के लिए उसी उद्यान में भूमिगत पार्किंग बनाने की तैयारी में है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो बनारस की एक और पहचान मिट जाएगी। पिछले 10 वर्षों में आम के बाग का रकबा भी 3923 हेक्टेयर घट गया है। लगातार घट रहे रकबे और पैदावार से बनारसी लंगड़ा अब ढ़ंढने पर भी नहीं मिलेगा।
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देश-दुनिया तक अपनी खास पहचान के लिए मशहूर लंगड़ा आम को बचाने की जद्दोजहद जिला उद्यान विभाग कर रहा है। खासतौर से खाड़ी देशों में इस आम की काफी डिमांड है। जिला उद्यान विभाग के अनुसार जिले में 5623 हेक्टेयर में आम के बगीचे थे लेकिन शहरीकरण और आधुनिकता में बगीचे कटते गए और बागों का दायरा सिमटता गया। पिछले दस सालों में जगह-जगह कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए और आम के बगीचों का रकबा घटकर 1725 हेक्टेयर में सीमित हो गया। इसमें लगभग 943 हेक्टेयर में लंगड़ा आम की खेती होती है। चिरईगांव, सेवापुरी, आराजीलाइन, बड़ागांव और पिंडरा में खेती होती है। सबसे अधिक खेती चिरईगांव में होती है। बौर अच्छी होने पर लंगड़ आम का उत्पादन प्रति हेक्टयर 18 से 20 टन होता है। सीजन में इसका उत्पादन करीब 15744 टन होता है। पैदावार के बाद अधिकतर आम बाहर चला जाता है। पहड़िया फल मंडी के आढ़ती दशरथ का कहना है कि यहां सीजन में बाहरी लंगड़ा करीब 60 हजार टन आता है। जो पूर्वांचलभर में जाता है।
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