सोमवार को गंगा महोत्सव के समापन समारोह में राजघाट की सीढ़ियों पर संगीत प्रेमियों की भीड़ को फिल्मी गायक बृजेश शॉडिल्य ने अपनी सुरीली आवाज का दीवाना बना दिया। एक के बाद एक फिल्मी गीतों की प्रस्तुति से बृजेश ने ऐसा समां बांधा तो देर रात तक घाट की सीढ़ियों पर श्रोता जमे रहे।
शिव कैलाश के वासी... की धुन जब फिजां में गूंजी तो हर कोई सुर से सुर मिलाने लगा। गंगा महोत्सव की अंतिम निशा फिल्मों गीतों के नाम रही। राजघाट के मुक्ताकाशीय मंच और गंगा का किनारा महोत्सव की प्रस्तुतियों के गवाह बने। देव दीपावली महोत्सव में आए दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों को सराहा तो देर रात तक झूमते रहे।
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सोमवार को गंगा महोत्सव के समापन समारोह में राजघाट की सीढ़ियों पर संगीत प्रेमियों की भीड़ को फिल्मी गायक बृजेश शॉडिल्य ने अपनी सुरीली आवाज का दीवाना बना दिया। एक के बाद एक फिल्मी गीतों की प्रस्तुति से बृजेश ने ऐसा समां बांधा तो देर रात तक घाट की सीढ़ियों पर श्रोता जमे रहे। उन्होंने अपने सबसे पहले शिव कैलाश के वासी गीत गाया तो घाट की सीढ़ियों पर बैठे लोग भी उनके साथ सुर में सुर मिलाकर झूम उठे। इसके बाद बृजेश ने फिल्मी गीत मेरा पिया घर आया, सइयोनी, दमादम मस्त कलंदर, किन्ना सोड़ा तुझे रब ने बनाया और इश्क वो बला है... जैसी गीतों की प्रस्तुति से समा बांध दिया। इसके बाद मनाली बोस ने ठुमरी विद्या में भजन प्रस्तुत किया। जिसके बोल थे चलो मन गंगा जमुना तीर..., दूसरी प्रस्तुति सुरभि सिंह ने दी। उन्होंने समूह के साथ कथक नृत्य के माध्यम से सुंदर कांड की प्रस्तुति दी। संचालन डाॅ. अलका निवेदन ने किया।