गंगा के सुरम्य तट पर आज की शाम गंगा महोत्सव के मुख्य आयोजन का आगाज गायन, वादन और नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों से होगा। शहनाई की मंगलध्वनि के साथ ही सुर, लय, ताल की धारा बह निकलेगी। पहली निशा में जाने माने वीणा वादक पं. विश्व मोहन भट्ट मोहन वीणा के तार झंकृत होंगे तो डॉ. वैंकटेश कुमार का ख्याल गायन यादगार बनेगा।
राजेंद्र गंगानी कथक नृत्य की भावपूर्ण थिरकन से संगीत निशा में चार चांद लगाएंगे। चार दिवसीय महोत्सव में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। एक नवंबर की शाम महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन से होगी। वह ख्याल के अलावा ठुमरी, दादरा की भी बंदिशें पेश करेंगी।
पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी और पं. देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी होगी। तबले पर संगत करेंगे पं. कुमार बोस। इनके बाद अंत में गीता चंद्रन भरत नाट्यम की थिरकन से मन मोहेंगी। दो नवंबर की शाम तीसरी निशा लोक और शास्त्रीय नृत्य के नाम समर्पित होगी।
इसमें अनु सिन्हा का कथक नृत्य होगा। इनके बाद तेरह ताली, भवई नृत्य अवं मांगड़यार गायन गंगा देवी समूह की ओर से किया जाएगा। तीन नवंबर को आखिरी निशा में संजीव अभयंकर का गायन होगा।
इनके बाद पं. भजन सोपोरी और अभय रुस्तम सोपोरी संतूर वादन पेश करेंगे। विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से महोत्सव की संगीत निशा विराम लेगी।