इनके साथ मृदंगम पर सत्यम प्रकाश, तबले पर अंकित मिश्र और अंशुमान महराज ने संगत की। गायक गणेश मिश्र ने दादरा में भरी सिर गागर छोड़ो मोरी बहियां, दिवाना किए श्याम कैसा जादू डाला और अंत में भजन सावरिया मन भायो की प्रस्तुति दी।
गायिका मधुमिता भट्टाचार्या ने केदार में द्रुत खयाल एकताल में गायन की शुरुआत की। जिसके बोल थे 'रंग की सारी क्यों छुपाई, फिर तीन ताल में चांदनी रात मोको ना सुहाये और दादरा में लागे तौरे नैनवा। इसके अलावा सौरव-गौरव मिश्र की जोड़ी ने नृत्य प्रस्तुत किया। समापन मां गंग भजन से किया। मंच का संचालन सुनील मान सिंह ने किया।
गंगा महोत्सव में प्रतिभाग करने आए अंकित तिवारी ने शुक्रवार को अमर उजाला से हुई बातचीत में कहा कि काशी में प्रस्तुति देना हर कलाकार की चाहत होती है। बनारस संगीत घरानों के साथ मस्तमौला रवायत के लिए जाना जाता है।
बाबा भोले शंकर की नगरी में दूसरी बार और मां गंगा के तट पर पहली बार आज अपनी गायकी प्रस्तुत कर रहा हुं। इसके अलावा अंकित तिवारी ने कहा कि कोविड के बाद हम लोग दोबारा इस तरह से शो कर रहे हैं जो कि बहुत अच्छी बात है। बनारस जब भी उन्हें याद करेगा वे प्रस्तुति देने यहां आयेंगे।