चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह
- फोटो : अमर उजाला
काशीपुराधिपति की नगरी काशी में मां गंगा की हालत चिंताजनक है। गंगा में फीकल कॉलीफार्म अस्सी और आदिकेशव घाट पर खतरनाक स्तर को भी पार कर चुका है। घाटों से दूर हो रही गंगा ने नदी विज्ञानियों के साथ ही संत समाज के माथे पर भी चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं।
इस मामले में गंगा महासभा ने चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है। गंगा महासभा ने प्रधानमंत्री से पत्र के माध्यम से गंगा की निर्मलता के लिए गुहार लगाई है। पीएम को लिखे गए पत्र में गंगा में लगातार गिरने वाले नालों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं।
गंगा महासभा के पत्र में कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि पिछले तीन साल के दौरान वित्तीय प्रबंधन, योजना और क्रियान्वयन में खामियां उजागर हुई हैं। गंगा के निर्मलीकरण के लिए आवंटित राशि का इस्तेमाल ही नहीं हो सका।
गंगा फंड में सौ करोड़ रुपये से अधिक पड़े होने के बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं हो सका। गंगा निर्मलीकरण के लिए आईआईटी समूह की रिपोर्ट धूल खा रही है। गंगा निर्मलीकरण के लिए 31 साल से योजनाएं चल रही हैं लेकिन सुधार के बजाय स्थितियां बिगड़ती चली गईं।
हरिद्वार से नीचे गंगा की मूलधारा में गंगाजल है ही नहीं। गंगा में 95 फीसदी से अधिक जल नहरों से निकाल लिया जाता है। नरौरा से लेकर प्रयाग तक गंगा की धारा सूख चुकी हैं।