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काशी में गंगा की हालत चिंताजनक, संत समाज ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Tue, 06 Mar 2018 02:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह - फोटो : अमर उजाला
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काशीपुराधिपति की नगरी काशी में मां गंगा की हालत चिंताजनक है। गंगा में फीकल कॉलीफार्म अस्सी और आदिकेशव घाट पर खतरनाक स्तर को भी पार कर चुका है। घाटों से दूर हो रही गंगा ने नदी विज्ञानियों के साथ ही संत समाज के माथे पर भी चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं।
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इस मामले में गंगा महासभा ने चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है। गंगा महासभा ने प्रधानमंत्री से पत्र के माध्यम से गंगा की निर्मलता के लिए गुहार लगाई है। पीएम को लिखे गए पत्र में गंगा में लगातार गिरने वाले नालों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं।

गंगा महासभा के पत्र में कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि पिछले तीन साल के दौरान वित्तीय प्रबंधन, योजना और क्रियान्वयन में खामियां उजागर हुई हैं। गंगा के निर्मलीकरण के लिए आवंटित राशि का इस्तेमाल ही नहीं हो सका।
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गंगा फंड में सौ करोड़ रुपये से अधिक पड़े होने के बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं हो सका। गंगा निर्मलीकरण के लिए आईआईटी समूह की रिपोर्ट धूल खा रही है। गंगा निर्मलीकरण के लिए 31 साल से योजनाएं चल रही हैं लेकिन सुधार के बजाय स्थितियां बिगड़ती चली गईं।

हरिद्वार से नीचे गंगा की मूलधारा में गंगाजल है ही नहीं। गंगा में 95 फीसदी से अधिक जल नहरों से निकाल लिया जाता है। नरौरा से लेकर प्रयाग तक गंगा की धारा सूख चुकी हैं। 
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आने वाली पीढ़ियों को भयानक परिणाम देखने को मिलेंगे

जलस्तर में कमी से सामनेघाट के पास मध्य धारा में भी जगह जगह रेत के टीले उभर आये हैं - फोटो : अमर उजाला

पत्र में कहा गया है कि नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा को 21 सितंबर 2016 को प्राधिकरण बनाकर औद्योगिक इकाईयों पर कार्यवाही के लिए शक्तियां दी गईं लेकिन 16 महीने के दौरान एक भी प्रदूषक इकाई पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।

समुचित आकलन के बगैर गंगा तटीय नगरों में एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है जो कि भविष्य में उपयोगी सिद्ध नहीं होंगे। गंगा में गंदगी की समस्या दूर नहीं होगी। मनमाने तरीके से अधिक लागत पर एसटीपी निर्माण के ठेके दिए जा रहे हैं।

न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय की अध्यक्षता में बना गंगा कानून का प्रारूप धूल फांक रहा है। गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि  गंगा की निर्मलता के लिए अब दृढ़ संकल्पित होने की आवश्यकता है।

बिना जनआंदोलन के इस बड़े प्रयास में सफलता नहीं मिल सकेगी। 31 साल से इसके लिए प्रयास चल रहे हैं लेकिन अभी तक इस मामले में कोई सफलता नहीं मिल सकी है। गंगा का यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ियों को भयानक परिणाम देखने को मिलेंगे।

गंगा के सूखने के कारण शहर का भूजल स्तर भी नीचे जा रहा है। गर्मियों में जल का संकट शहरवासियों को झेलना पड़ सकता है। संत समाज इस मामले में मंथन कर रहा है और बहुत जल्द ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
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