काशी विद्यापीठ ब्लाक के भगवानपुर, डोमरी, नैपुराकला, रमना, सराय डेगरी, बेटावर, सीरगोवर्धन, सूजाबाद, तारापुर, टिकरी, छितूपुर, छितौनी कोट, मूडादेव, माधोपुर। वहीं चिरईगांव ब्लाक में लूठाकला, छितौनी, मिश्रपुरा, मुरीदपुर, सरसौल, तातेपुर, धराधर, अमौली, बर्थराखुर्द, मोकलपुर, चांदपुर, कमौली, कुकुडा, अम्बा, मुस्पफाबाद, परानापुर, रमचंदीपुर, सरायमोहाना, सिरिस्ती, बभनपुरा, शिवदशा, सिंगवार, गोबरहा और चौलापुर ब्लाक का कैथी, मोलनापुर, चंद्रावती, ढाका, गौराउपरवार और रामपुर शामिल हैं।
ऐसे विकसित होंगे रोजगार के नए साधन
गांव-गांव होने वाली गंगा आरती के आयोजन से धार्मिक पर्यटन के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। काशी के गुरुकुल और आश्रम में रहने वाले बटुक व पुजारियों को रोजगार के नए अवसर का सृजन होगा। अखिल भारतीय संत समिति की ओर से काशी में तैयार होने वाले पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के युवाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद होगा। हालांकि गंगा आरती के आयोजनों को स्थानीय लोगों की जनसहभागिता से किया जाएगा।
नई पीढ़ी का बढ़ेगा गंगा से जुड़ाव
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि इससे भारतीय धर्म, संस्कृति, परंपरा का विकास होगा और नई पीढ़ी का गंगा से जुड़ाव बढ़ेगा। गंगा आरती होने के कारण लोगों में अपने आप गंगा की स्वच्छता और उसमें गंदगी न किए जाने की भावना विकसित होगी। इससे गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के सरकारी अभियान को बल मिलेगा। यह नदी, जल और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम है।