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काशी के 44 गांवों में होगी गंगा आरती, चबूतरे बनेंगे और घाट होंगे विकसित

Fri, 05 Feb 2021 09:19 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी में गंगा आरती - फोटो : अमर उजाला
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काशी में गंगा किनारे के गांवों का नजारा भी अब बदला-बदला नजर आएगा। जिले के 44 गांवों नमामि गंगे ने अब गंगा आरती कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। गंगा आरती के जरिए जहां गंगा से जुड़ाव होगा वहीं धार्मिक पर्यटन और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। गंगा स्वच्छता और निर्मलीकरण के लिए जन-जन को गंगा से जोड़ने की पहल शुरू की जा रही है। प्रदेश भर में चल रही योजना के तहत काशी के 44 गांवों कों गंगा आरती के लिए चिन्हित किया गया है।

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योजना के तहत इन गांवों में गंगा चबूतरे का निर्माण किया जाएगा। यह ऐसे गांव हैं जिनका पानी सीधे गंगा में गिरता है। योजना के तहत गंगा के पांच किलोमीटर के दायरे में दोनों किनारों पर बसे गांवों में नए आरती स्थलों के निर्माण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गंगा के दोनों किनारों पर पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वहां के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक स्थलों एवं घाटों को विकसित किया जाना है। नमामि गंगे के संयोजक व जिला गंगा समिति के सदस्य राजेश शुक्ला ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा है कि जन-जन गंगा से धार्मिक रूप से जुड़ें। गंगा तट पर रहने वाले जब गंगा से धार्मिक रूप से जुड़ेंगे तो उसमें गंदगी करने से पहले सौ बार जरूर सोचेंगे।

इन गांवों में बनेंगे गंगा चबूतरा

काशी विद्यापीठ ब्लाक के भगवानपुर, डोमरी, नैपुराकला, रमना, सराय डेगरी, बेटावर, सीरगोवर्धन, सूजाबाद, तारापुर, टिकरी, छितूपुर, छितौनी कोट, मूडादेव, माधोपुर। वहीं चिरईगांव ब्लाक में लूठाकला, छितौनी,  मिश्रपुरा, मुरीदपुर, सरसौल, तातेपुर, धराधर, अमौली, बर्थराखुर्द, मोकलपुर, चांदपुर, कमौली, कुकुडा, अम्बा, मुस्पफाबाद, परानापुर, रमचंदीपुर, सरायमोहाना, सिरिस्ती, बभनपुरा, शिवदशा, सिंगवार, गोबरहा और चौलापुर ब्लाक का कैथी, मोलनापुर, चंद्रावती, ढाका, गौराउपरवार और रामपुर शामिल हैं।

ऐसे विकसित होंगे रोजगार के नए साधन

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गांव-गांव होने वाली गंगा आरती के आयोजन से धार्मिक पर्यटन के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। काशी के गुरुकुल और आश्रम में रहने वाले बटुक व पुजारियों को रोजगार के नए अवसर का सृजन होगा। अखिल भारतीय संत समिति की ओर से काशी में तैयार होने वाले पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के युवाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद होगा। हालांकि गंगा आरती के आयोजनों को स्थानीय लोगों की जनसहभागिता से किया जाएगा।

नई पीढ़ी का बढ़ेगा गंगा से जुड़ाव

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि इससे भारतीय धर्म, संस्कृति, परंपरा का विकास होगा और नई पीढ़ी का गंगा से जुड़ाव बढ़ेगा। गंगा आरती होने के कारण लोगों में अपने आप गंगा की स्वच्छता और उसमें गंदगी न किए जाने की भावना विकसित होगी। इससे गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के सरकारी अभियान को बल मिलेगा। यह नदी, जल और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम है।
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