गंगा महोत्सव के अंतर्गत जिस शिल्प बाजार में पिछले साल स्टाल पाने के लिए मारामारी थी, वहां इस बार सन्नाटा है। गांधी शिल्प बाजार का आगाज फीका रहा। पांच सौ और एक हजार के नोट बंदी का असर यह रहा कि न तो स्टाल व्यवस्थित नजर आए और न ही ग्राहक दिखे। हालांकि शनिवार को मेले का उद्घाटन करते हुए लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल और कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि मेले में बंद नोट स्वीकारे जाएं। मेला 21 नवंबर तक चलेगा।
सुरेंद्र पटेल ने मेला परिसर में प्रतिदिन फागिंग और पानी का छिड़काव कराने का निर्देश दिया। कमिश्नर ने बताया कि शिल्प बाजार में पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मेघालय, कर्नाटक, बंगाल, राजस्थान, गुजरात समेत लगभग सभी प्रांतों के शिल्पी भाग ले रहे हैं। यहां 334 स्टाल लगाए गए हैं। लगभग 50 से अधिक शिल्पी खुले में भी शिल्प का प्रदर्शन करेंगे।
यहां वुलेन शाल, कश्मीरी शाल, हैंड ब्लॉक, लेदर बैग, जूती, जरी जूती, ज्वैलरी, पैच वर्क, जूट क्राफ्ट, ब्रास मेटल, पेंटिंग, कुंदन ज्वैलरी आदि आकर्षण का केंद्र हैं। रंगोली, केन एवं बंबू, चर्मशिल्प, पटचित्र, मिथिला, पेंटिंग, धातु शिल्प व ब्लू आर्ट पॉटरी आदि सामग्री विशेष रूप से लोगों को आकर्षित करेंगे। यहां राजस्थानी, साउथ इंडियन, चाइनीज व्यंजनों का भी स्टाल है।
शिल्प बाजार दोपहर एक से रात नौ बजे तक खुला रहेगा। प्रवेश शुल्क प्रतिदिन 10 रुपये है। दस वर्ष तक के बच्चों और विदेशी पर्यटकों का प्रवेश नि:शुल्क है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पुलकित खरे, सहायक निदेशक हथकरघा, उपायुक्त उद्योग केंद्र उमेश सिंह तथा क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र मिश्रा उपस्थित रहे।