प्रयागराज का रहने वाला, यूपी के कई जिलों में फैलाया ठगी का जाल
प्रयागराज के करेली थाना क्षेत्र के जीटीवी नगर करेली कॉलोनी निवासी राशिद नसीम ने 2013 में वाराणसी में शाइन सिटी का ऑफिस खोला था। कैंट थाना क्षेत्र के जेपी मेहता रोड पर शाइन सिटी कार्यालय में स्थानीय प्रभावशाली कुछ लोगों को कंपनी में निदेशक और अन्य कई पदों की जिम्मेदारियां सौंप दी।
राशिद नसीम एमडी और उसके भाई आसिफ ने धीरे-धीरे हाईवे और शहर के अन्य इलाकों में किसानों से जमीन का अनुबंध कराया। एक ही जमीन को चार-पांच लोगों को बेचते रहे। गोल्ड, टूर पैकेज और धन दोगुना करने का झांसा देकर भी लोगों की गाढ़ी कमाई ठगते रहे।
2019 में रुपये हड़पने के बाद राशिद लापता हो गया। बाद में मालूम चला कि वह दुबई में सोने का कारोबार कर रहा है। होटल संचालित कर रहा है। 2019 से राशिद नसीम उसके सहयोगियों पर वाराणसी में प्राथमिकी दर्ज होनी शुरू हुई। 2021 के बाद से प्राथमिकी की झड़ी लग गई।
वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई, 18 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई थी
कमिश्नरेट के पूर्व पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने 2021 में शाइन सिटी के आरोपियों पर शिकंजा कसा था। राशिद की 18 करोड़ से अधिक की संपत्ति वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज में गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की थी। इंटर स्टेट ऑपरेशन के तहत राशिद नसीम के भाई आसिफ नसीम, इनर सर्किल में शामिल शाइन सिटी इंफ्रा के निदेशक और मंडुवाडीह के सिंधुरिया कॉलोनी निवासी डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव, उसकी पत्नी मीरा श्रीवास्तव, जैतपुरा के काजी सहदुल्लपुर निवासी मोहम्मद तारीक, महाराजगंज के देवरिया निवासी मुश्ताक आलम, बरेली के हरिद्वारी निवासी आर्यन भार्गव, चितईपुर के सुसुवाही निवासी राजीव सिंह की गिरफ्तारी की गई थी।
राजीव सिंह और मुश्ताक आलम जिला चौकाघाट जेल में है तो आसिफ नसीम समेत अन्य आरोपियों का लखनऊ जेल में ट्रांसफर हो चुका है। 2021 के बाद शाइन सिटी के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। न ही संपत्ति जब्त की गई।
ईओडब्ल्यू के पास 100 से अधिक प्राथमिकी की जांच
राशिद देश छोड़ने से पहले 30 करोड़ की धनराशि विदेश भेज चुका था। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया था कि गुजरात की एक कंपनी के जरिये रुपये किस्तों में भेजा गया था। आसिफ नसीम ने जिला जेल चौकाघाट में बंद रहने के दौरान भी कई चौंकाने वाली जानकारियां ईओडब्ल्यू को दी थीं। आसिफ ने पूछताछ में बताया कि धोखाधड़ी की प्राथमिकी सिलसिलेवार दर्ज होने लगी तो राशिद ने 2019 में देश छोड़ कर भाग गया।
वह भारत से नेपाल गया था फिर नेपाल से ही यूएई गया था और दुबई में कारोबार करने लगा था। राशिद जानता था कि उसके फर्जीवाड़े का खुलास जरूर होगा इसलिए देश छोड़ने से पहले उसने विदेशी लेनदेन के लिए अधिकृत गुजरात की एक कंपनी से 30 करोड़ करीबियों के बैंक अकाउंट में विदेश भेज दिए थे। जांच एजेंसियों से जुड़े अफसरों ने बताया कि देश छोड़ने से पहले राशिद नसीम ने हवाला के जरिये भी तगड़ी रकम करीबियों के पास विदेश भेजी थी।
40 फीसदी लोगों पर और 60 फीसदी खुद पर करता था खर्च
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि राशिद नसीम पहले से ही निर्धारित कर रखा था कि फर्जीवाड़े से मिले रुपये में से कितना और कहां खर्च करना है। किसी कस्टमर से 100 रुपये मिलते थे तो उसमें 40 फीसदी तक ऑफिस स्टाफ, ऑफिस मेंटेनेंस, एजेंट, क्लाइंट मीटिंग, साइट विजिट और पार्टी पर खर्च किए जाते थे। 60 फीसदी राशिद खुद के लिए बचत करने के साथ ही जमीन में भी निवेश करता था।