किरन ने बताया कि लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी ना तो पैसे वापस मिले और ना ही उक्त जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम पर नहीं हुई। इस पर उन्होंने विनोद को अपने घर बुलाकर पैसा लौटाने को कहा। तब विनोद ने कुछ और समय देने के लिए कहा। पारिवारिक संबंध होने के कारण वह भी मान गई। इसके बाद शुरू हुआ टाममटोल का 2022 तक जारी रहा। किरन ने बताया कि बीते अप्रैल में विनोद ने जमीन के कागजात दिए।
उन कागजात को सदर तहसील में चेक कराने पर पता लगा कि वह जमीन विनोद के नाम नहीं बल्कि उसकी पत्नी के नाम है। इस तरह से विनोद ने उनसे झूठ बोला था कि जमीन उसके नाम पर है। विनोद से जब उन्होंने फिर अपने पैसे की मांग की तो वो, अखिलेश और मार्कंडेय उन्हें देख लेने की धमकी देने लगे। इस संबंध में मंडुवाडीह थाना प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।