कहां से लेनी हैं दवाएं यह डॉक्टर ही बताते हैं
बीएचयू स्थित एक फार्मेसी के पूर्व सहायक प्रबंधक अमित सेठ का कहना है कि डॉक्टर चैंबर के भीतर ही मरीजों को बता देते हैं कि उन्हें कहां से दवाएं लेनी हैं। गांव से आने वाले लोगों को दवाओं के कॉम्बिनेशन आदि की जानकारी नहीं होती है। उन्हें डॉक्टर ने जहां से बता दिया, वहीं से दवा लेना उनकी मजबूरी हो जाती है।
कॉम्बिनेशन की दवाएं भी केंद्र पर नहीं मौजूद
फार्मासिस्ट रतन सिंह बताते हैं कि सामान्य बुखार या किसी भी समस्या में डॉक्टर एंटीबायोटिक के तौर पर दवाएं लिखते हैं। दवाएं जनऔषधि केंद्रों पर सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं, लेकिन कई डॉक्टर उससे मिलते-जुलते कॉम्बिनेशन की दवाएं लिख देते हैं। ज्यादातर दवाएं प्राइवेट दुकानों से लेनी पड़ती हैं।
ये दवाएं जनऔषधि केंद्रों पर नहीं हैं मौजूद
- कैंसर की दवा : कैपसिटाबिन, आईमाटीनिब, इंडोक्सान, सर्कुमिन, सिस्प्लाटिन इंजेक्शन, पैक्लिटैक्सेल इंजेक्शन, जेम्सिटाबिन इंजेक्शन, डॉक्सिटेक्सान इंजेक्शन।
- लीवर और गैस्ट्रो संबंधी दवाएं : रिफाक्सामिन, मेबेवेरिन, वोरिकोनाजोल, सेफ्टाजिडिम इंजेक्शन, अल्बुमिन।
- सांस और फेफड़े संबंधी दवाएं : एसिब्रोफायलिन, बिलास्टिन, एसिब्रोफायलिन के साथ मांटेलुकास्ट सोडियम।
जनऔषधि केंद्रों पर 244 तरीके की दवाइयां रखवाई गई हैं। कई दवाएं ऐसी हैं जिनके मरीज कम आते हैं इसलिए मौजूद नहीं रहती हैं। कोई दवा यदि नहीं मिल रही है तो उसे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ