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UP Crime: फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने दी जानकारी, कहा- विकास दुबे व अतीक-असरफ केस की वैज्ञानिक जांच में लगे 3-3 महीने

Sat, 14 Mar 2026 06:05 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के उपनिदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि साइंटिफिक जांच में कोई भी दबाव नहीं बना सकता है। अगर ऐसा किया तो फंस जाएंगे।
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फॉरेंसिक जांच। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Forensic Investigation: फॉरेंसिक जांच में समय लग जाता है। जब केस आतंकी, माफिया और रेप से जुड़े हो तो ये बहुत ही संवेदनशील होता है। जांच के दौरान बार-बार इससे जुड़े मुठभेड़ भी होते रहते हैं। ऐसे में जांच लंबी होती जाती है। माफिया विकास दुबे और अतीक-असरफ केस की वैज्ञानिक जांच में ढाई से तीन महीने लग गए थे। 

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बीएचयू में शुक्रवार को पहुंचे क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, अलीगढ़ के उपनिदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने ये बात अमर उजाला से कही। वह केंद्र के संस्थापक समन्वयक स्वर्गीय प्रो. भीम बली प्रसाद की स्मृति पर कार्यक्रम में बीएचयू के विज्ञान संस्थान में थे। 

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि विकास दुबे केस में सबसे ज्यादा सैंपल और हथियार मिले थे, जिनकी जांच कई दिन तक चलती रही। इन दोनों केस में लगातार मुठभेड़ भी चलते रहे तो फॉरेंसिक फाइल बड़ी होती चली गई। एक बार किसी केस को पूरा करते-करते उसी से जुड़ा मामला आने लगा था। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस की ओर से दिए गए हर जांच के लिए पर्याप्त समय लेकर रिपोर्ट दी जाती रही है।

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फॉरेंसिक जांच में कोई नहीं बना सकता दबाव
उपनिदेशक डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि फॉरेंसिक मामलों में कोई भी किसी तरह का दबाव नहीं बना सकता। हम अपनी रिपोर्ट में कोई घालमेल इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि ये रिपोर्ट साइंटिफिक होती है। इस तरह से प्रेशर में कुछ नहीं कर सकते। कुछ गलत करेंगे तो आगे चलकर फंसना भी तय है। ऐसे में कोई भी दबाव बनाएगा तो भी वैज्ञानिकों पर उसका कोई असर नहीं होता। एनआईए, एटीएस सहित कई एजेंसियों के केस लैब में आते हैं जिसमें बड़ी सफाई से कार्य किया जाता है।
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