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Varanasi News : BHU के SVDV में पहली बार गूंजे चारों वेदों के मंत्र, महामना ने की सभा की अध्यक्षता

Fri, 29 Nov 2024 02:30 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में होने वाले इस आयोजन में देशभर के संतों का जुटा हुआ। अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा की शुरुआत गणपति पूजन से हुई। शास्त्रार्थ की शुरुआत चेन्नई के विद्वान आचार्य मणि द्राविड़ ने की।
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अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा में शमिल विद्वान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पहली बार चारों वेदों के मंत्र गुंजायमान हो उठे। देशभर के विद्वानों ने शास्त्रों की पंक्तियों का संस्कृत में सस्वर पाठ किया। आयोजन की खास बात यह रही कि तीन दिवसीय आयोजन की अध्यक्षता महामना पं. मदन मोहन मालवीय कर रहे हैं।

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बृहस्पतिवार को संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा की शुरुआत गणपति पूजन से हुई। चारों वेदों की सात शाखाओं का पारायण आरंभ हुआ। शास्त्रार्थ की शुरुआत चेन्नई के विद्वान आचार्य मणि द्राविड़ ने की। उन्होंने कहा कि उपक्रमन्याय का उपयोग वेद के अर्थ को बताने और सही अर्थ निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

इसके पूर्व ऋग्वेद की साकल शाखा का स्वाध्याय रामचंद्र देव, रोहित देव ने किया। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा का स्वाध्याय जयकृष्ण दीक्षित, भालचंद्र बादल, डॉ. मणि झा, नारायण उपाध्याय और काण्व शाखा का स्वाध्याय श्रीनिवास पुराणिक, अनिरुद्ध पेठकर ने किया। 
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कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का स्वाध्याय शेखर द्रविड़, नारायण घनपाठी, वीर राघव, कृष्णमुरारि त्रिपाठी ने, सामवेद की कौथुम शाखा का स्वाध्याय पं. हरदत्त त्रिपाठी व अशोक त्रिपाठी ने और अथर्ववेद की शौनक शाखा का पारायण गोपाल रटाटे व गोविंद ने किया। 

वेदों के विधान धर्म
पुणे के आचार्य राजेश्वर देशमुख ने कहा कि वेदों में जो विधान हैं, वे सभी धर्म की श्रेणी में आते हैं और जिनका निषेध है वह अधर्म हैं। देवप्रयाग उत्तराखंड के गणेशवर नाथ झा ने अपवाद शब्द के बारे में बताया। गणपति भट्ट ने सर्वांशे प्रमात्वविचार:..पर शास्त्रार्थ किया। 

ये रहे मौजूद
इस दौरान प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, डॉ. श्रीराम ए एस, प्रो. हरिकेश सिंह, प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी, प्रो. चंद्रमौलि द्विवेदी, प्रो. गोपबंधु मिश्र, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. कमलेश झा, प्रो. कौशलेंद्र, प्रो. पतंजलि, प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी मौजूद रहे। 

भगवान राम और माता सीता का लगन लिखकर महोत्सव का हुआ शुभारंभ
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत प्रांगण भगवान राम और माता सीता के विवाह का साक्षी बनने के लिए तैयार है। बृहस्पतिवार को भगवान राम और माता सीता का लगन लिखकर महा महोत्सव की शुरुआत हुई। सिय-पिय मिलन महा महोत्सव की रामलीलाएं 29 नवंबर से आरंभ होंगी। 

दीक्षांत प्रांगण में होने वाले विवाह महोत्सव में श्रीरामजी, सियाजी के कुलदेवता और पितरों का आह्वान किया गया। इसके बाद शुभ लगन लिखा गया। इसमें सभी से आशीर्वाद प्रदान करने की प्रार्थना की गई। इसके बाद भगवान को खीर-पूड़ी के भोग का वितरण किया गया। 

अध्यक्षता बरसाना से पधारे संत रामरज और गौतम बाबा सरकार ने की। संपूर्ण अनुष्ठान मामाजी महाराज की बेटी सिया दीदी और उनकी महिला सहयोगियों के निर्देशन में हुआ। इस दौरान अशोक अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, निर्मला अग्रवाल, वेद अग्रवाल, मंटू जालान आदि मौजूद रहे। 
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संस्कृत सीखना सबके लिए जरूरी : जिला जज
जनपद न्यायाधीश संजीव पांडेय ने कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है। इसलिए इसे अमर भाषा भी कहा जाता है। विलुप्त होने की कगार पर खड़ी संस्कृत भाषा के संवर्धन के लिए जरूरी है कि बच्चों को प्राइमरी स्कूल से ही संस्कृत की शिक्षा दी जाए। वह सेंट्रल बार एसोसिएशन के गांधी सभागार में आयोजित संस्कृत दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को बोलचाल की भाषा में संस्कृत का इस्तेमाल करना चाहिए। मैं स्वयं अब संस्कृत भाषा सीखने का प्रयत्न करूंगा। समारोह में संस्कृत भाषा में वादन प्रतियोगिता हुई। अधिवक्ताओं को जिला जज ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान श्रीभास सूपकार, भाषाविद सुरेश शास्त्री, डाॅ. अत्रि भारद्वाज, बनारस बार के अध्यक्ष अवधेश सिंह और महामंत्री कमलेश सिंह यादव ने भी विचार व्यक्त किए। 

अध्यक्षता मुरलीधर सिंह ने की। संचालन महामंत्री सुरेंद्रनाथ पांडेय ने किया। इस मौके पर मंगलेश दूबे, योगेश उपाध्याय, सुनंदा सहाय, कल्पना पटेल, डाॅ. संजय अग्रवाल, नित्यानंद राय, डाॅ. अविनाश यादव, अभिषेक द्विवेदी आदि मौजूद रहे। 
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