वेदों के विधान धर्म
पुणे के आचार्य राजेश्वर देशमुख ने कहा कि वेदों में जो विधान हैं, वे सभी धर्म की श्रेणी में आते हैं और जिनका निषेध है वह अधर्म हैं। देवप्रयाग उत्तराखंड के गणेशवर नाथ झा ने अपवाद शब्द के बारे में बताया। गणपति भट्ट ने सर्वांशे प्रमात्वविचार:..पर शास्त्रार्थ किया।
ये रहे मौजूद
इस दौरान प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, डॉ. श्रीराम ए एस, प्रो. हरिकेश सिंह, प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी, प्रो. चंद्रमौलि द्विवेदी, प्रो. गोपबंधु मिश्र, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. कमलेश झा, प्रो. कौशलेंद्र, प्रो. पतंजलि, प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी मौजूद रहे।
भगवान राम और माता सीता का लगन लिखकर महोत्सव का हुआ शुभारंभ
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत प्रांगण भगवान राम और माता सीता के विवाह का साक्षी बनने के लिए तैयार है। बृहस्पतिवार को भगवान राम और माता सीता का लगन लिखकर महा महोत्सव की शुरुआत हुई। सिय-पिय मिलन महा महोत्सव की रामलीलाएं 29 नवंबर से आरंभ होंगी।
दीक्षांत प्रांगण में होने वाले विवाह महोत्सव में श्रीरामजी, सियाजी के कुलदेवता और पितरों का आह्वान किया गया। इसके बाद शुभ लगन लिखा गया। इसमें सभी से आशीर्वाद प्रदान करने की प्रार्थना की गई। इसके बाद भगवान को खीर-पूड़ी के भोग का वितरण किया गया।
अध्यक्षता बरसाना से पधारे संत रामरज और गौतम बाबा सरकार ने की। संपूर्ण अनुष्ठान मामाजी महाराज की बेटी सिया दीदी और उनकी महिला सहयोगियों के निर्देशन में हुआ। इस दौरान अशोक अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, निर्मला अग्रवाल, वेद अग्रवाल, मंटू जालान आदि मौजूद रहे।
संस्कृत सीखना सबके लिए जरूरी : जिला जज
जनपद न्यायाधीश संजीव पांडेय ने कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है। इसलिए इसे अमर भाषा भी कहा जाता है। विलुप्त होने की कगार पर खड़ी संस्कृत भाषा के संवर्धन के लिए जरूरी है कि बच्चों को प्राइमरी स्कूल से ही संस्कृत की शिक्षा दी जाए। वह सेंट्रल बार एसोसिएशन के गांधी सभागार में आयोजित संस्कृत दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को बोलचाल की भाषा में संस्कृत का इस्तेमाल करना चाहिए। मैं स्वयं अब संस्कृत भाषा सीखने का प्रयत्न करूंगा। समारोह में संस्कृत भाषा में वादन प्रतियोगिता हुई। अधिवक्ताओं को जिला जज ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान श्रीभास सूपकार, भाषाविद सुरेश शास्त्री, डाॅ. अत्रि भारद्वाज, बनारस बार के अध्यक्ष अवधेश सिंह और महामंत्री कमलेश सिंह यादव ने भी विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता मुरलीधर सिंह ने की। संचालन महामंत्री सुरेंद्रनाथ पांडेय ने किया। इस मौके पर मंगलेश दूबे, योगेश उपाध्याय, सुनंदा सहाय, कल्पना पटेल, डाॅ. संजय अग्रवाल, नित्यानंद राय, डाॅ. अविनाश यादव, अभिषेक द्विवेदी आदि मौजूद रहे।