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संतान के लिए लोलार्क कुंड में उमड़ा रेला, कई महिलाएं बेहोश

Sun, 20 Sep 2015 02:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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संतान के निमित्त लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए शनिवार को दंपतियों का रेला उमड़ पड़ा। भीड़ को संभालने के  लिए पहली बार बैरिकेडिंग की गई थी लेकिन श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ने से ये सभी प्रबंध छोटे पड़ गए। शुक्रवार की रात से ही भीड़ का दबाव इस तरह बढ़ा कि सुबह होने तक गोदौलिया-लंका मार्ग पैक हो गया। पुलिस ने बैरियर लगाकर श्रद्धालुओं को रोकने की कोशिश की तो धक्कामुक्की और नोकझोंक से माहौल बिगड़ने लगा। तीखी धूप और उमस में बच्चों को लेकर बैरिकेडिंग में लगी कई महिलाओं के बेहोश होने से दिनभर अफरातफरी मची रही। स्नान-मेला समिति के मुताबिक शाम तक दो लाख से अधिक आस्थावानों ने स्नान किया।
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भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पर स्नान के लिए देश अलग-अलग इलाकों से पहुंचे दंपतियों की कतार शुक्रवार की शाम से ही लगने लगी। इस बार व्यवस्था प्रशासन के हाथ होने की वजह से कुंड पर श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाए बिना ही रात 11 बजे स्नान शुरू करा दिया गया। रात 12 बजे तक भक्तों की कतार शिवाला से आगे बढ़ गई। पहली बार बैरिकेडिंग से होकर कुंड तक जाने की व्यवस्था की गई थी। सुबह होते-होते कतार सोनारपुरा से होकर पांडेय हवेली तक पहुंच गई। दिन के आठ बजे तक गोदौलिया-लंका मार्ग श्रद्धालुओं की भीड़ के

चलते पैक हो गया। सोनारपुरा, हरिश्चंद्र घाट तिराहे से लेकर अग्रवाल रेडियो तक हजारों महिलाएं सड़कों के बीच इंतजार करते बैठी नजर आईं। भीड़ का दबाव बढ़ने पर पुलिस ने शिवाला के पास बैरियर लगाकर श्रद्धालुओं को रोकना शुरू कर दिया। इससे कई बार स्थिति असहज हो गई। चिलचिलाती धूप में पानी के बिना श्रद्धालु तड़पते रहे। हालांकि काशी के लोग भक्तों की मदद में आगे आए और पानी-गुड़ बांटा जाने लगा लेकिन धक्कामुक्की और उमस में कई महिलाएं गिरकर बेहोश हो गईं। पांडेयपुर की तारा, दुलारी, श्यामा, रेवती के अचेत होने के बाद उन्हें कतार से बाहर निकालकर सेवादारों ने पास की गली में पहुंचाया। गाजीपुर के सैदपुर की अनीता और रेवती भी बेहोश हो गईं। भीड़ से निकालकर दोनों को बाबा केदारनाथ अध्यात्म सेवा समिति के
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कार्यालय के बाहर पहुंचाया गया, वहां पानी के छींटे चेहरे पर डाले गए तो वे होश में आईं। हालांकि कुंड पर प्रशासन की सख्ती के चलते इस बार दुर्व्यवस्था नहीं फैलने पाई। एक तरफ से श्रद्धालुओं को छोड़ा जाता रहा और स्नान के बाद गोस्वामी तुलसी दास अखाड़ा से होकर श्रद्धालुओं को रानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली और द्वारिकाधीश मंदिर के पास से बाहर निकाला जाता रहा। डुमराव बाग कॉलोनी से भी दूसरी कतार अस्सी होते हुए कुंड पर पहुंच रही थी। स्नान करने वाली महिलाओं ने कुंड पर ही कपड़े, चूड़ियां और शृंगार की वस्तुओं का परित्याग किया। इससे कुंड पर पुराने कपड़ों के ढेर लग गए। श्रद्धालुओं ने लौकी, कइत के अलावा कई तरह के फल भी कुंड में अर्पित किए।
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