बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेते अधिकारी
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घाटों से काफी आगे निकल चुकी गंगा की धारा अब सड़कों पर प्रवाहित हो रही है। गंगा-वरुणा तटवर्ती तमाम गांव-मोहल्ले घिर गए हैं तो घरों में एक मंजिल तक पानी भर गया है। कुछ ने छतों पर डेरा डाला है तो बाढ़ क्षेत्र से निकलने के लिए तमाम लोग परेशान हैं। पानी शहर की ओर बढ़ता जा रहा है।
बाढ़ के कारण 25 हजार से ज्यादा की आबादी प्रभावित है। यदि बढ़ाव ऐसे ही होता रहा तो आगामी समय में बाढ़ के उच्चतम बिंदु 73.901 मीटर तक जल स्तर पहुंच जाएगा। बनारस की सड़कों पर गाड़ियों की बजाय नावें चलने लगेंगी। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। एनडीआरएफ के साथ ही पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद है।
वाराणसी में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ 1978 में आई थी। उस समय गंगा का जलस्तर 73.90 मीटर पहुंच गया था। इसे वाराणसी में बाढ़ का उच्चतम बिंदु माना जाता है। 2013 में 72.63 मीटर और 2016 में 72.56 मीटर तक गंगा का जलस्तर पहुंचा था। 2019 में भी खतरे का निशान पार कर गंगा का जलस्तर 71.46 मीटर तक पहुंचा था।