नाव से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
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डॉ. शिव शक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि जिस तरह से बाढ़ का पानी शहर से लेकर गांव तक पहुंच रहा है उससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोगों से साफ सफाई के साथ ही उन्हें पानी में कम से कम आने जाने की सलाह दी जा रही है। विशेषकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूरी बांह का कपड़ा पहनना चाहिए।
बाढ़ की जद में आया नमो घाट
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गंगा में बढ़ाव का आलम ये है कि नमो घाट पर नमस्कार की मुद्रा वाली आकृति को डूबने अब कुछ ही घंटे बाकी हैं। बाकी अन्य पक्के घाटे भी धीरे-धीरे डूबते जा रहे हैं। दशाश्वमेधऔर शीतलाघाट के जरिए पानी सड़क होते हुए सब्जी मंडी के तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों में रमना, डाफी, चिरईगांव, व चौबेपुर आदि इलाकों के दर्जनभर से अधिक गांवों का सम्पर्क आसपास से कट गया है।
गंगा के रौद्र रूप के कारण आई बाढ़ से शहर में 19 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। इसमें 661 परिवार के 3432 बाढ़ पीड़िताें को शरण दी गई है। राहत एवं बचाव के लिए 58 नावें लगाई गई हैं। बाढ़ से जनपद के कुल 20 वार्ड, 99 ग्राम सभा सहित कुल 119 ग्राम सभा एवं वार्ड के 15318 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। 19 राहत चौकी स्थापित की गईं हैं।
बाढ़ चौकियों पर पशुपालन विभाग द्वारा पशुधन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है और पशु चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से पशुओं के चिकित्सा एवं टीकाकरण कार्य कराया जा रहा है। एनडीआरएफ कमांडेंट मनोज कुमार शर्मा के निर्देशन में एनडीआरएफ की टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, एडीएम सिटी गुलाब चंद्र ने एनडीआरएफ टीम के साथ मारुति नगर इलाके में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। जिलाधिकारी ने प्रभावित लोगों की समस्याओं को सुना और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।