नदी की लहरें भारत माता मंदिर की दीवार से टकरा रही हैं। इससे नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नवली, चिऊटीडांड, पतनई, सरया, बीबीपुर, गोधनी, ठाकुर गांव, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, महुआ बारी, ठीकरहिया, महाबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवो में पानी घुसने के डर से लोग भयभीत हैं। बाढ़ से बचाव के लिए पांच बाढ़ चौकियों और सात बाढ़ शरणालयों को सक्रिय कर दिया गया है। एडीएम के. हरि सिंह ने बताया कि बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। एसडीएम और तहसीलदार को बाढ़ पीड़ितों की मदद के निर्देश दिए गए हैं।
घाघरा का जलस्तर तेजी से बढने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। दुबारी क्षेत्र में नालों के रास्ते निचले इलाकों में पानी भर गया है। दर्जनों संपर्क गांव पानी से डूब गए हैं। बिंद टोलिया सहित तीन किलोमीटर के दायरे में कटान जारी है। प्रतिदिन लगभग 15 बीघा जमीन नदी में विलीन हो रही है। एक दर्जन से अधिक गांव नदी के घेरे में आ गए हैं। पशुओं के चारे का संकट बढ़ने लगा है। लेकिन, अभी तक प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।