इसी क्रम में ओडिशा की पुलिस ने एसटीएफ की वाराणसी इकाई से संपर्क किया। बताया कि नकली दवा की सप्लाई करने वाले आरोपी वाराणसी के ही रहने वाले हैं। आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ के इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में ओडिशा पुलिस के साथ संयुक्त टीम गठित की गई।
सर्विलांस की मदद से केदारघाट से शुभम और अभिषेक को पकड़ा गया। दोनों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर चंद्रशेखर, रितेश और गौरव को गिरफ्तारी किया गया। आरोपियों को अदालत में पेश कर ओडिशा पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ ले जाएगी।
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अभिषेक कुमार सिंह और शुभम जायसवाल अपना-अपना लाइसेंस बनवा कर दवाओं की सप्लाई का काम करते थे। दवाओं की सप्लाई के काम के दौरान ही चंद्रशेखर सिंह, रितेश जायसवाल और गौरव शर्मा से उनका संपर्क हुआ था। चंद्रशेखर, रितेश और गौरव की जान-पहचान नकली दवा सप्लाई करने वाले गिरोह के सरगना अशोक कुमार से थी और तीनों उसके लिए काम भी करते थे।
अशोक व उसके गिरोह के अन्य सदस्य उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से नकली दवा मंगवा कर अभिषेक और शुभम के लाइसेंसी फर्म के माध्यम से ओडिशा में बरगढ़ स्थित अशोक मेडिकल हॉल और झारसुगुड़ा स्थित अमित मेडिकल एजेंसी को सप्लाई करने लगे। ओडिशा में जब दो मुकदमे दर्ज हुए तो शुभम और अभिषेक दवा सप्लाई के अपने लाइसेंस को निरस्त करा लिए थे। फिलहाल शुभम और अभिषेक नकली दवा की सप्लाई का काम चंद्रशेखर, रितेश और गौरव के माध्यम से बगैर फर्म के ही कर रहे थे।