साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने बताया कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों ने सरकार से यह अनुरोध किया कि हस्तलिखित ग्रंथों की खोज में जो हिंदी की पुस्तकें मिलें, उनकी सूची एशियाटिक सोसाइटी प्रकाशित करे। सरकार की सहमति के बाद हिंदी हस्तलेखों की खोज का काम शुरू हो गया। इसके तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश में लाखों हस्तलेखों का विवरण प्रकाशित किया गया। इस दौर में नागरी प्रचारिणी सभा ने हिंदी के हस्तलेखों का इतना विशाल संग्रह पुस्तकालय में जमा कर लिया, जितना एक स्थान पर संसार में कहीं अन्यत्र नहीं है। इसमें 25 हजार हस्त लेख संस्कृत के भी हैं, जिसके अध्ययन अध्यापन के लिए विश्व भर से शोध छात्र व विद्वान वाराणसी आते हैं।