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रंगभरी एकादशी का पहला दिन: ‘गौरा गोदी में लेके गणेश विदा होइ हैं'..मंगल गीतों के साथ हुई उत्सव की शुरुआत

Wed, 01 Mar 2023 07:19 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में महंत आवास पर गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह को तेल हल्दी की रस्म के लिए सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली संध्या बेला में महंत आवास पहुंची।
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रंगभरी एकादशी उत्सव का पहला दिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिव-पार्वती विवाह के बाद रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा के गौना की रस्म उत्सव का कार्यक्रम मंगलवार से टेढ़ी नीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर आरंभ हो गया। महंत आवास पर गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह को तेल हल्दी की रस्म के लिए सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली संध्या बेला में महंत आवास पहुंची।

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इस उत्सव में मोहल्ले की बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हुईं। शुक्रवार की शाम हुए इस उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को हल्दी लगाई। मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो उठा।
लोक संगीत के बीच बीच शिव-पार्वती के मंगल दाम्पत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला। ‘गौरा के हरदी लगावा, गोरी के सुंदर बनावा...’,‘सुकुमारी गौरा कइसे कैलास चढ़िहें...’, ‘गौरा गोदी में लेके गणेश विदा होइहैं ससुरारी...’ आदि गीतों में गौने के दौरान दिखने वाली दृश्यावली का बखान किया गया। मंगल गीतों में यह चर्चा भी की गई कि गौना के लिए कहां क्या तैयारी हो रही है। दुल्हे के स्वागत के लिए कौन कौन से पकवान पकाए जा रहे हैं।

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वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर काशी की गलियों में सपरिवार निकले बाबा विश्वनाथ। - फोटो : अमर उजाला
सखियां पार्वती का साज शृंगार करने के लिए कैसे कैसे सुंदर फूल चुन कर ला रही हैं। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए ‘साठी क चाऊर चूमिय चूमिय..’ गीत गाकर महिलाओं ने गौरा की रजत मूर्ति को चावल से चूमा। गौरा के तेल-हल्दी की रस्म के लिए महंत डा. कुलपति तिवारी सानिध्य मे संजीव रत्न मिश्र ने माता गौरा का श्रृंगार किया और हल्दी रस्म पुजन आचार्य सुशील त्रिपाठी ने कराया व अंकशास्त्री पं. वाचस्पति तिवारी के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम "शिवांजली" के अंतर्गत श्रद्धालु महिलाओं द्वारा शिव भजनों की प्रस्तुति की। 

तीन मार्च को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा को लेकर लोकाचार के लिए महंत आवास पर पालकी की मरम्मत से लेकर बाबा के राजसी स्वरूप और पुजन परंपरा के साथ गौरा के गौना के सामानो को सूची बद्ध कर लिया गया है
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