रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों से कटकर मवेशियों की हो रही मौतों को पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। छपरा-बाराबंकी-गोरखपुर के बीच रेलवे ट्रैक के दोनों किनारों पर फेंसिंग (स्टील बैरिकेडिंग) का काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद अब दूसरे चरण में गोरखपुर से वाराणसी और गोरखपुर से आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा रूट पर फेंसिंग की जाएगी। फेंसिंग कराने से हादसों पर अंकुश लगेगा। इसकी तैयारी रेल प्रशासन ने शुरू कर दी है।
रेलवे ट्रैक खुला होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र में लोग कहीं से भी इसे पार करने लगते हैं। इसके अलावा इस पर जानवर भी आ जाते हैं। इस वजह से कई बार हादसे भी हो जाते हैं। बुधवार को ही कैंपियरगंज के पास रेल ट्रैक पर आए 100 भेड़ की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। वहीं, लखनऊ से गोरखपुर होकर छपरा रूट पर वंदेभारत और अमृत भारत जैसी तेज गति से ट्रेनों को चलाने के लिए रूट को सुरक्षित किया जाना भी जरूरी है।
छपरा से बाराबंकी के बीच करीब 250 किमी दूरी तक फेंसिंग लगाने का काम हो गया है। पहले केवल स्टेशन या आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास ही फेंसिंग कराने की व्यवस्था थी। स्टेशन के आसपास दीवार चलाई गई है, लेकिन अब पूरे ट्रैक को ही दोनों तरफ से कवर किया जाना है। एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि छपरा से बाराबंकी के बीच फेंसिंग लगाने का काम तेजी से हो रहा है। इसके बाद सभी मेन लाइनों के किनारे फेंसिंग की जाएगी।