सुबह की सैर व खुली हवा, लाख रुपये की दवा, इस कहावत को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन नहीं मानता है। इसी वजह से विश्वविद्यालय परिसर में जाकर योग, व्यायाम करने व टहलने वाले लोगों पर शुल्क थोप दिया गया। इसके पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क भी अजीब है। केंद्र व राज्य सरकारें योग को बढ़ावा दे रही हैं। सुबह व शाम सैर करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुहिम को आगे बढ़ाने में सरकारी व गैर सरकारी संगठन भी लगे हैं। इसके बावजूद विद्यापीठ की कुलानुशासक ने परिसर में प्रवेश यानी योग व सुबह-शाम की सैर पर शुल्क लगा दिया।
अन्नपूर्णा कॉलोनी निवासी डॉ. अशोक राय ने कहा कि सरकार खेलकूद व टहलने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। हाल ही में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स संपन्न हुए हैं। इसमें योग प्रतियोगिता कराई गई।हर दिन सुबह परिसर में टहलना होता है। कोई भीड़ नहीं लगती है।इस फैसले का विरोध होगा। मामले की शिकायत पीएम, राज्यपाल व सीएम से की जाएगी।
महमूरगंज निवासी अरविंद केशरी ने कहा कि सुबह और शाम टहलने के लिए तो डॉक्टर भी कहते हैं। इसके लिए शुल्क लगना ठीक नहीं है। पानी और शुद्ध हवा तो निशुल्क मिलनी ही चाहिए। टहलने जाने वालों से फीस वसूलने का फैसला अव्यवहारिक है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय का हरा-भरा परिसर
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वाराणसी शहर में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) भी है। केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में शहरवासी पहुंचते हैं। योग करके आते हैं, लेकिन कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। बनारस रेल कारखाना (बरेका) परिसर में भी कोई शुल्क नहीं लगता है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुबह -शाम की सैर पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है।
काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय की कुलानुशासक प्रो. अमिता सिंह ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक, परिसर में सुबह, शाम टहलने वालों की संख्या अधिक होती है। माहौल मेले जैसा लगता है। इससे छात्र-छात्राओं को दिक्कत होती है। पैदल निकलना मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। कुलानुशासक कार्यालय में आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र की छायाप्रति, फोटो व 250 रुपये जमा कराके पहचान पत्र बनवाए जा सकते हैं।
60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नागरिकों को प्रतिमाह शुल्क से राहत दी गई है, लेकिन उन्हें भी 250 रुपये जमा कराके प्रवेश पत्र बनवाने होंगे। इससे वरिष्ठ नागरिक हैरान हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद एक-एक रुपये का महत्व होता है। सुबह-शाम की सैर व योग के लिए शुल्क जमा कर पाना मुश्किल है। अब तो सब कुछ बंद करना पड़ेगा।
संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम सिगरा में सबसे अधिक लोग सुबह और शाम टहलते थे, लेकिन इन दिनों स्टेडियम का कायाकल्प कराया जा रहा है। टहलने की कोई खास जगह नहीं है। इस कारण कैंट, मलदहिया, महमूरगंज, सिगरा और आसपास के इलाकों के लोग काशी विद्यापीठ परिसर में टहलने जाते हैं।