जांच के दौरान खांसी आने पर उसे वहीं रोक लिया, जबकि बेटे को होम क्वारंटीन में भेज दिया था। तबीयत बिगड़ने के कारण 23 मई को उसकी क्वारंटीन सेंटर में ही मौत हो गई। मौत के कुछ देर बाद जांच रिपोर्ट आई तो पता चला कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित था। इसके बाद तो फिर कोई शव के पास जाने को तैयार नहीं हुआ। जैसे-तैसे शव को किट में रखकर एंबुलेंस से शहर के पचहटिया स्थित रामघाट ले जाया गया।
गांव के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन किए गए इकलौते बेटे को जब पिता के मौत की खबर लगी तो अंतिम दर्शन के लिए वह छटपटाने लगा। काफी कोशिशों के बाद भी कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका जताते हुए उसे वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई। घाट पर मौजूद बड़ी बेटी ने रूढ़ियों को दरकिनार कर शव को मुखाग्नि दी। प्रोटोकॉल के तहत उसे पास नहीं जाने दिया गया।
पीपीई किट पहनकर उसने शव में दूर से ही आग लगाई। बेटी यूपी पुलिस में सिपाही है। उसकी पोस्टिंग फैज़ाबाद जिले में है। इस दौरान एसडीएम केराकत चन्द्रभान पाठक, कोतवाल बिंद कुमार आदि मौजूद रहे।
'पिता की सेवा का आखिरी मौका था, कैसे छोड़ती'
पिता की मौत से बेसुध बेटी ने क्वारंटीन सेंटर में पिता की सही देखभाल और उपचार न होने का आरोप लगाया। पिताजी की तबीयत तीन दिन पहले से ही खराब थी। उन्हें खासी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ थी, जिसकी सूचना 1076 समेत सभी अधिकारियों को दी गई थी। नोडल अधिकारी के द्वारा भी चिकित्सा अधीक्षक को लिखित रूप से सूचना दिया गया था।
बावजूद उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। जब पिताजी के स्वास्थ्य के बारे में सुना था, तभी से मन में बेचैनी बढ़ गई थी। पिता से मिलने के लिए ही छुट्टी लेकर घर के लिए निकली थी, लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले ही मनहूस खबर मिल गई। पूरे परिवार को इस बात का मलाल है कि सब कुछ होते हुए भी हम अंतिम समय में उनकी सेवा नहीं कर सके। बस मुखाग्नि का ही मौका मिला तो उसे कैसे जाने देती। कम से कम यह तसल्ली तो रहेगी।