वाराणसी। किसान आंदोलन के बीच और धान की रोपाई से पहले सरकार के खरीफ सीजन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दरों में वृद्धि की घोषणा से किसानों को कुछ राहत मिली है। इसके बाद कई किसानों ने तो सब्जियों की खेती छोड़कर इस बार धान ही लगाने का मन बना लिया है। वहीं किसान संघ इसे कम बताया है।
मै पहले चार बीघा में धान और 15 बिस्वा में सब्जियों की खेती करता था। मगर एमएसपी के वृद्धि की सूचना के बाद मैने चार की बजाय छह बीघा धान की रोपाई के लिए नर्सरी डाल दी है।
-फौजदार, किसान, परानापट्टी, सेवापुरी
तीन बीघा में धान के साथ सब्जियों की भी खेती किया था। इस बार अच्छी आमदनी नहीं हुई। एमएसपी बढ़ी है तो खानेभर सब्जी खेती करूंगा बाकी के पांच बीघा धान लगाने की तैयारी है।-सुभाष पाल ,किसान परानापट्टी, सेवापुरी
धान और गेहूं को छोड़ और किसी फसल को नीलगाय और छुट्टा पशु पकाने नहीं देते हैं। एमएसपी बढ़ी है तो इस बार धान का रकबा चार के बजाय छह बीघा किया है।-राजकुमार, किसान, सेवापुरी
एमएसपी बढ़ने से कोरोना महामारी और महंगाई में बड़ी राहत मिली है। पशुओं से परेशान किसान अब सिर्फ धान और गेहूं की खेती पर ज्यादा जो दे रहे हैं। जिन्हें एमएसपी फायदा मिलेगा।
-दुर्गा नारायण, किसान, रघुनाथपुर बड़ागांव
भारतीय किसान मोर्चा संघ प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद का कहना है कि 1940 रुपये प्रति क्विंटल धान की एमएसपी ऊंट के मुंह मे जीरा के समान है। धान की रोपाई से लेकर क्रय केंद्रों तक जाने में करीब लागत 3550 रुपये प्रति क्विंटल खर्च आता है। जिसमें खाद, बीज, सिंचाई, परिवहन, मजदूर खर्च शामिल। एमएसपी एक सर्कुलर के तहत जारी किया गया है। जिसमें बिचौलियों के और व्यपारियों के खिलाफ निर्धारित एमएसपी से कम कीमत लेने पर कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। एमएसपी को कानून के तहत लागू किया जाना चाहिए ताकि कम कीमत पर खरीद करने वाले दंडित हो सकें।
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इनसेट...
82 रुपये बढ़ी धान की कीमत
सरकार ने इस वर्ष खरीफ के प्रमुख फसल धान के लिए प्रति क्विंटल एमएसपी 1940 रुपये की है जो पिछले वर्ष 1868 रुपये थी। वहीं दलहनी और तिलहनी फसलों में 300 से 400 रुपये वृद्धि की घोषणा की है।