फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केंद्रों के किचकिच से बच रहे किसान, घर पर ही बेच दे रहे गेहूं

विज्ञापन
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष ज्यादा गेहूं की खरीद हो चुकी है। वहीं कई केंद्र ऐसे हैं जहां पिछले वर्ष के मुकाबले कम खरीद हुई है। व्यापारी किसानों के घर और खेतों पर पहुंचकर 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीद कर ले रहे हैं। इससे क्रय केंद्रों के किचकिच से किसान बच रहे हैं।
विज्ञापन

एक अप्रैल से जिले में गेहूं खरीद के लिए 34 क्रय केंद्र खोले गए हैं। रोहनिया क्षेत्र के मिल्कीचक स्थित क्रय केंद्र के प्रभारी मिथिलेश पांडेय ने बताया कि बुधवार तक 110 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई जबकि पिछले साल अब तक है 4690 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी।
दरेखू क्रय केंद्र के प्रभारी जगदीश सिंह ने बताया कि 20 दिनों में 2200 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। जबकि पिछले साल 9636 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई हुई थी। केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बोरा उपलब्ध है, लेकिन किसान केंद्रों पर कम पहुंच रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से थोड़े कम मूल्य पर बाजार में भी गेहूं बिक जा रहा है। छोटे किसान घर से ही बेच दे रहे हैं। केंद्र पर लाने का किराया भी बच जा रहा है। सेवापुरी के तक्खू की बौली केंद्र पर 125 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है, जबकि पिछले वर्ष 3500 क्विंटल खरीद हुई थी। खाद्य विभाग के चोलापुर के गोसाईपुर मोहांव केंद्र पर 300 क्विंटल की खरीद हुई जबकि पिछले साल 500 क्विंटल की खरीद हुई थी
विज्ञापन

जिले 34 क्रय केंद्र सक्रिय है जहां 258 किसानों से 8480 क्विंटल गेहूं की खरीद हो गई, जो पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा है। सरकार की ओर से किसानों के लिए वैकल्पिक सुविधा है कि वे अपनी इच्छानुसार कहीं भी गेहूं बेच सकते हैं। - अरुण कुमार त्रिपाठी, जिला विपणन अधिकारी
पिछले साल के मुकाबले व्यापारी बढ़ाकर दे रहे दाम
सरकार ने इस वर्ष गेहूं की कीमत 2015 रुपये प्रति क्ंिवटल निर्धारित की है, वहीं मंडी में प्रति क्विंटल गेहूं कीमत 2020 रुपये है। पिंडरा के किसान रमेश, बड़ागांव के दुर्गानरायण सहित कई किसानों का कहना है जब व्यापारी घर पर ही आकर 1900 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल में गेहूं खरीद ले रहे हैं। क्रय केंद्रों पर जाने भाड़ा, भुगतान में देरी और नंबर लगाने जैसी तमाम मुश्किलें क्यों झेलें। पिछले साल कम व्यापारी गांव में आते थे लेकिन इस बार व्यापारी घर और खेत में जाकर गेहूं खरीद रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें