परिजनों के साथ खड़े धर्मेंद्र
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि वह वहां सभी 27 भारतीय के साथ कंपनी में सुरक्षित थे। अंदर खाने से लेकर इलाज तक की सुविधा थी। लेकिन, बाहर के हालात को लेकर हम सब चिंतित थे। आजमगढ़ के मुबारकपुर थाना क्षेत्र के नरावं गांव निवासी धर्मेंद्र चौहान सोमवार को घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि स्टील प्लांट से वह शुक्रवार 20 अगस्त को ढाई बजे दिन में घर के लिए निकले थे। बस से काबुल हवाई अड्डे पहुंचा तो भीड़ थी।
अगले दिन शनिवार को दिन के 11 बजे पासपोर्ट देखकर नाम-पता नोट करने के बाद बस में सवार सभी यात्रियों को होटल ले जाया गया। वहां भोजन में सब्जी, रोटी, चावल दिया गया। उसके बाद बाईपास गेट से आधी रात को काबुल एयरपोर्ट में प्रवेश कराया गया। भोर में चार बजे विमान ने उड़ान भरी। विमान रविवार को आठ बजे सुबह हिंडन एयरपोर्ट, गाजियाबाद पहुंचा। बस से उन्हें दिल्ली भेजा गया। वहां से धर्मेंद्र साथियों के साथ बस से गोरखपुर पहुंचा। गोरखपुर से जीयनपुर के रास्ते घर पहुंचे।